
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को प्रत्यक्ष पुनर्वित्त के रूप में 33,785.65 करोड़ रुपये प्रदान किया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 27,767.64 करोड़ रुपये था। इस तरह एक वर्ष में पुनर्वित्त में 6,018.01 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।
नाबार्ड के वित्तीय विवरणों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक उसके पुनर्वित्त पोर्टफोलियो में उत्पादन एवं विपणन ऋण के तहत 1,81,068.83 करोड़ रुपये तथा मध्यम और दीर्घकालिक परियोजना ऋण के तहत 2,89,283.02 करोड़ रुपये शामिल थे। नाबार्ड की पुनर्वित्त व्यवस्था के दायरे में राज्य सहकारी बैंक, राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक समेत अन्य संस्थान भी आते हैं।
सहकारी ऋण व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए चल रही पैक्स कंप्यूटरीकरण परियोजना पर भी नाबार्ड ने खर्च किया। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित इस परियोजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 83.22 करोड़ रुपये का व्यय/समायोजन दर्ज किया गया।
सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए बनाए गए सहकारी विकास कोष के तहत भी खर्च में तेज वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 में इस कोष से 105.25 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह राशि 54.55 करोड़ रुपये थी। इस तरह खर्च में करीब 93 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। मार्च 2026 के अंत में कोष में 300 करोड़ रुपये का शेष था।
नाबार्ड ने विभिन्न विकास कोषों के तहत कुल 280.32 करोड़ रुपये का प्रचारात्मक व्यय किया। इसमें उत्पादक संगठन विकास कोष के लिए 116.95 करोड़ रुपये, कृषि क्षेत्र प्रोत्साहन कोष के लिए 15.12 करोड़ रुपये और ग्राम्य विकास निधि के लिए 37.66 करोड़ रुपये शामिल हैं।
इसी अवधि में अल्पकालिक सहकारी ग्रामीण ऋण कोष में जमा राशि भी बढ़ी। 31 मार्च 2026 को इस कोष में 35,000 करोड़ रुपये जमा थे, जबकि एक साल पहले यह राशि 32,079.11 करोड़ रुपये थी। इन जमाओं पर वित्त वर्ष 2025-26 में नाबार्ड ने 1,662.89 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान किया।
नाबार्ड के वित्तीय विवरणों के मुताबिक, मार्च 2026 तक उसकी कुल अग्रिम राशि 9,30,822.88 करोड़ रुपये रही। इसमें ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष के तहत 1,98,551.75 करोड़ रुपये और नाबार्ड अवसंरचना विकास सहायता के तहत 53,574.88 करोड़ रुपये शामिल हैं।
नाबार्ड के आंकड़े बताते हैं कि डीसीसीबी को पुनर्वित्त उपलब्ध कराने के साथ-साथ पैक्स के कंप्यूटरीकरण और सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए भी वित्तीय गतिविधियों में तेजी आई है। इससे ग्रामीण सहकारी ऋण व्यवस्था को मजबूत करने में नाबार्ड की भूमिका और महत्वपूर्ण होती दिखाई देती है।



