
क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटियों में तकनीक के इस्तेमाल के जरिए ऋण व्यवस्था को मजबूत बनाने और सदस्य-केंद्रित सेवाओं को बेहतर करने के उद्देश्य से भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) ने गुजरात स्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड के सहयोग से “टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड लेंडिंग: अंडरस्टैंडिंग द लेंडिंग टेक्नोलॉजी स्टैक” विषय पर वेबिनार आयोजित किया।
कार्यक्रम में देशभर की सहकारी ऋण समितियों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। गुजरात स्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड के चेयरमैन और एनसीयूआई की जनरल काउंसिल के सदस्य घनश्यामभाई एच. अमीन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अमीन ने कहा कि सहकारी ऋण समितियों को प्रतिस्पर्धी बने रहने और वित्तीय तंत्र में अपनी भूमिका का विस्तार करने के लिए तकनीक अपनाने के साथ-साथ पेशेवर प्रबंधन और संस्थागत मजबूती पर भी ध्यान देना होगा।
एनसीयूआई के कार्यकारी निदेशक राजीव शर्मा ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि रखते हुए राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसी मजबूत, पेशेवर, कुशल और तकनीक-सक्षम सहकारी संस्थाओं के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया, जो उभरती आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
वेबिनार में मुख्य प्रस्तुति के दौरान प्रतिभागियों को लेंडिंग टेक्नोलॉजी स्टैक के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इसमें बताया गया कि तकनीक ऋण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को अधिक प्रभावी बनाकर परिचालन दक्षता, आंतरिक नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन को मजबूत कर सकती है तथा सदस्यों को तेज और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।
वेबिनार के दौरान तकनीक आधारित ऋण व्यवस्था अपनाने से जुड़े अवसरों, चुनौतियों और व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने यह समझने का प्रयास किया कि मौजूदा प्रणालियों के साथ डिजिटल उपकरणों को किस प्रकार जोड़ा जा सकता है और इनके माध्यम से संस्थागत क्षमता को कैसे मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन एनसीयूआई के उप निदेशक अनुराग ने किया। वेबिनार ने इस बात को रेखांकित किया कि तकनीक, पेशेवर प्रबंधन और मजबूत संस्थागत प्रक्रियाओं के बेहतर समन्वय से सहकारी ऋण क्षेत्र को अधिक कुशल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।



