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रुपी बैंक: विलय प्रस्ताव के खारिज होने से निवेशक निराश

संकटग्रस्त रुपी सहकारी बैंक के कई निवेशकों को उम्मीद थी कि विलय के बाद स्थिति में सुधार हो सकता है लेकिन आरबीआई ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) के साथ रुपी सहकारी बैंक के विलय प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

इस संदर्भ में सहकारी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सहकारी नेताओं ने कहा कि संकटग्रस्त बैंक को पुनर्जीवित करने की दिशा में आरबीआई का यह निर्णय चीजों को और अधिक जटिल बना देगा।

पाठकों को याद होगा कि यह बैंक आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अधीन है और इस साल जून में भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिशा-निर्देशों की अवधि को 31 अगस्त, 2021 तक बढ़ा दिया था। यूसीबी 22 फरवरी, 2013 से दिशा-निर्देशों के तहत रखा गया है, जिसकी वैधता समय-समय पर बढ़ाई गयी है।

इस प्रगति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, एमएससीबी के अध्यक्ष विद्याधर अनस्कर ने कहा कि एमएससी बैंक ने आरबीआई को वित्तीय रिपोर्ट सौंपी थी। अनस्कर को उम्मीद थी कि इस विषय पर आरबीआई का रुख सकारात्मक होगा क्योंकि उन्होंने इस मामले में नाबार्ड की कोई भूमिका को नहीं देखा था।

पहले संकटग्रस्त बैंक का विलय काफी मुश्किल था क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्वयं आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे।

इस बीच, बैंक का बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर डिफॉल्टरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू कर रहा है ताकि ऋणों की वसूली की जा सके। बैंक के निदेशक मंडल के प्रशासक सुधीर पंडित के हवाले से कहा गया है कि जनवरी 2021 तक बैंक ने कुल 258.11 करोड़ रुपये की वसूली की और पिछले चार वर्षों में 53.19 करोड़ रुपये का परिचालन लाभ अर्जित किया।

पंडित के अनुसार, बैंक अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए हर संभव कदम उठा रहा है, जिसमें उधारकर्ताओं की संपत्तियों को कुर्क करना और उनके गारंटरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करना शामिल है। उन्होंने कहा कि बैंक पिछले पांच साल से परिचालन लाभ कमा रहा है।

आरबीआई द्वारा प्रस्ताव को खारिज करने के बाद पंडित रुपी सहकरी बैंक को स्मॉल फाइनेंस बैंक में बदलने के भी विरुद्ध नहीं हैं।

रुपी बैंक से 6 लाख से ज्यादा जमाकर्ता जुड़े हुए हैं। डीआईसीजीसी अधिनियम में हालिया संशोधन पारित होने पर छोटे जमाकर्ताओं को मदद मिलेगी लेकिन संस्थागत जमाकर्ताओं को तब तक नुकसान होता रहेगा जब तक कि बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं हो जाता।

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