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पीएमसी: एचडीआईएल की विवादग्रस्त संपत्तियों को बेचने के लिए समिति गठित

बंबई उच्च न्यायालय ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोआपरेटिव (पीएमसी) बैंक घोटाले में संलिप्त हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. (एचडीआईएल) की संपत्तियों की बिक्री के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई है। न्यायालय ने सरोश दमानिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस राधाकृष्णन करेंगे। समिति के दो अन्य सदस्यों का चयन समिति के अध्यक्ष करेंगे। समिति सबसे पहले एचडीआईएल की संपत्तियों को बेचेगी और देखेगी कि क्या यह ऋण की राशि के बराबर है,  दैनिक इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट।

अदालत ने कहा कि समिति पहले एचडीआईएल की बंधक संपत्तियों का मूल्यांकन करे और उन्हें बेचे। उसके बाद भी यदि कुछ कमी पड़ती है तो वधावन के स्वामित्व वाली संपत्तियों को बेचा जाए।

वधावनों के वकील का कहना है कि की संपत्तियों की कीमत लगभग 11,000 करोड़ रुपये है, जबकि एचडीआईएल पर केवल 4355 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है, जैसा कि ईओडब्ल्यू द्वारा दायर एफआईआर में उल्लेख किया गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी वधावनों को जेल से उनके घर में शिफ्ट करने का आदेश दिया, जहाँ जेल के गार्ड उन पर निगरानी रखेंगे। वधावन को एचडीआईएल की संपत्तियों के मूल्यांकन में सहयोग देने को कहा है।

याचिकाकर्ता द्वारा अदालत में यह तर्क दिए जाने के बाद कि इस गति से वसूली में उम्र लग सकती है और गरीब ग्राहकों को अपना पैसा वापस पाने के लिए अनंत काल तक इंतजार करना पड़ सकता है, उच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।

अगर पीएमसी बैंक कुल बकाया वसूलने में सक्षम नहीं हुआ तो कोर्ट भार-रहित संपत्तियों की बिक्री का आदेश दे सकता है।

“भारतीयसहकारिता” ने पहले बताया है कि ईडी ने उक्त बैंक के मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट 7,000 पृष्ठों में है और उसमें एचडीआईएल के प्रमोटर राकेश कुमार वधावन, उनके बेटे सारंग, पीएमसी बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस और पूर्व चेयरपर्सन वरियाम सिंह के नाम हैं।

आरबीआई द्वारा नियुक्त प्रशासक ने पीएमसी बैंक के बड़े जमाकर्ताओं से अनुरोध किया था कि वे तीन साल तक अपना पैसा न निकालें। बैंक के प्रशासक का मानना है, इससे बैंक तीन साल तक स्थिर परिसंपत्ति के आधार के रूप  में 3,500 करोड़ रुपये का कोष बना सकेगा।

यह भी बताया गया कि कुछ प्रमुख जमाकर्ता अपनी जमा राशि वापस नहीं लेने को तैयार हैं। इससे पहले, बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं ने आरबीआई कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया था।

सितंबर 2019 में पीएमसी बैंक घोटाला सामने आया था जब रिजर्व बैंक को पता चला कि बैंक ने कथित रूप से लगभग दिवालिया हो चुके एचडीआईएल को दिए गए कर्जों में लगभग 6,700 करोड़ रुपये छिपाने के लिए काल्पनिक खाते बनाए। आरबीआई के अनुसार, पीएमसी बैंक ने अपनी मूल बैंकिंग प्रणाली के साथ छेड़छाड़ करके, एचडीआईएल लोन अकाउंट सहित 44 समस्याग्रस्त ऋण खातों को छिपाया और उन खातों तक केवल सीमित कर्मचारी ही पहुंच सकते थे।

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