
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) में गवर्नेंस, संस्थागत क्षमता और पेशेवर प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया है। केंद्रीय बैंक ने साथ ही आरबीआई, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (आरसीएस) और सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार (सीआरसीएस) के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत रेखांकित की।
आरबीआई ने 1 सितंबर 2026 को अपने नई दिल्ली कार्यालय में सहकारी समितियों के रजिस्ट्रारों (आरसीएस) का तीसरा सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में आरबीआई के उप गवर्नर स्वामीनाथन जे. और शिरिश चंद्र मुर्मू, सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार शिव पाल सिंह, विभिन्न राज्यों के आरसीएस तथा आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
उप गवर्नर स्वामीनाथन जे. ने यूसीबी में सुदृढ़ गवर्नेंस और संस्थागत क्षमता विकसित करने के साथ-साथ आरबीआई तथा आरसीएस/सीआरसीएस के बीच घनिष्ठ समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां समय पर नियामकीय कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
स्वामीनाथन जे. ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में क्षमता और कौशल निर्माण के लिए ‘मिशन सक्षम’ को एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
उप गवर्नर शिरिश चंद्र मुर्मू ने कहा कि भारत में सहकारिता की जड़ें गहरी हैं, लेकिन जब कोई सहकारी समिति बैंक के रूप में कार्य करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करती है, तो उसकी जिम्मेदारियां और जवाबदेही भी बढ़ जाती हैं।
उन्होंने यूसीबी में पेशेवर और ‘फिट एंड प्रॉपर’ निदेशक मंडल तथा वरिष्ठ प्रबंधन, मजबूत आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था और प्रौद्योगिकी के अधिक इस्तेमाल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कमजोर यूसीबी के मामलों के समयबद्ध समाधान की आवश्यकता भी रेखांकित की।
सीआरसीएस शिव पाल सिंह ने सहकारी अधिकारियों और आरबीआई के बीच और बेहतर समन्वय, यूसीबी के निरंतर व्यावसायिककरण तथा परिसमापन के अंतर्गत आने वाले बैंकों के मामलों के समय पर समाधान पर जोर दिया।
सम्मेलन के दौरान यूसीबी से जुड़े विभिन्न गवर्नेंस, नियामकीय और पर्यवेक्षी मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें आरबीआई तथा निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) से संबंधित अपेक्षाएं भी शामिल रहीं।
सम्मेलन में दिए गए संदेश से स्पष्ट है कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में मजबूत गवर्नेंस, पेशेवर नेतृत्व, तकनीकी सुरक्षा और प्रभावी नियामकीय समन्वय को आने वाले समय में और अधिक महत्व दिया जाएगा।



