
महाराष्ट्र के सहकारिता विभाग ने स्पष्ट किया है कि सहकारी बैंक चुनावों में केवल इस आधार पर किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता कि उसने संशोधित बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत निदेशक के रूप में लगातार 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है।
यह स्पष्टीकरण विधि एवं न्याय विभाग की 18 अगस्त 2026 की कानूनी राय के बाद आया है। राय में महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक विद्याधर अनास्कर द्वारा रखे गए कानूनी पक्ष को सही माना गया है।
कानूनी राय का मुख्य सवाल यह था कि क्या महाराष्ट्र सहकारी समितियां (समितियों के चुनाव) नियम, 2014 के तहत नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) को बैंकिंग विनियमन अधिनियम में निर्धारित 10 वर्ष की कार्यकाल सीमा के आधार पर उम्मीदवार का नामांकन खारिज करने का अधिकार है।
पिछले शुक्रवार को जारी पत्र में सहकारिता विभाग ने सहकार आयुक्त एवं महाराष्ट्र के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार तथा राज्य सहकारी चुनाव प्राधिकरण के सचिव को इस कानूनी स्थिति से अवगत कराया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा।
विधि विभाग ने कहा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम की संशोधित धारा 10ए(2ए)(i) सहकारी बैंक के उन निदेशकों पर प्रतिबंध लगाती है, जिन्होंने लगातार 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। हालांकि, महाराष्ट्र सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 में इस आधार पर कोई समान अयोग्यता निर्धारित नहीं की गई है।
राय के अनुसार, महाराष्ट्र सहकारी समितियां (समितियों के चुनाव) नियम, 2014 के नियम 25(2) में नामांकन खारिज करने के लिए निर्धारित आधार दिए गए हैं। इनमें महाराष्ट्र सहकारी समितियां अधिनियम, नियमों या संबंधित उपविधियों के तहत अयोग्यता शामिल है। लेकिन बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत उत्पन्न होने वाली अयोग्यता का निर्धारण या उसे लागू करने का स्पष्ट अधिकार आरओ को नहीं दिया गया है।
विधि विभाग ने बैंकिंग कानून के तहत आरबीआई की नियामक शक्तियों और चुनाव प्रक्रिया में आरओ की सीमित भूमिका के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। केवल बैंकिंग विनियमन अधिनियम में 10 वर्ष की पाबंदी होने से आरओ के अधिकारों का विस्तार नहीं हो जाता।
राय में यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य सहकारी चुनाव प्राधिकरण का 16 जनवरी 2026 का परिपत्र आरओ को अतिरिक्त वैधानिक अधिकार नहीं दे सकता। किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान के अभाव में आरओ को 10 वर्ष की कार्यकाल सीमा के आधार पर नामांकन खारिज करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
महाराष्ट्र में सहकारी बैंक चुनावों के लिहाज से यह स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है। पुणे और लातूर समेत कई जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के चुनाव घोषित हो चुके हैं। वहीं, वाई अर्बन कोऑपरेटिव बैंक सहित अन्य शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के निदेशकों को भी इससे राहत मिल सकती है।
हालांकि, बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत 10 वर्ष की कार्यकाल सीमा लागू है, लेकिन मौजूदा महाराष्ट्र चुनावी व्यवस्था के तहत केवल इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर उम्मीदवार का नामांकन खारिज नहीं कर सकते।



