
मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सहकारिता क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं।
सरकार ने सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को दिए जाने वाले अल्पकालीन फसल ऋण पर ब्याज अनुदान के लिए 720 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त सहकारी बैंकों को इक्विटी अंशदान एवं शेयर पूंजी सहायता के रूप में 575 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को प्रबंधकीय अनुदान के रूप में 168 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। स्थापना व्यय तथा ऑडिट बोर्ड के लिए 70-70 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
इसके अलावा, दुग्ध क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ साझेदारी कर मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ को मजबूत करने की पहल की है।
प्रदेश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 707 ग्राम दूध उपलब्धता, जो राष्ट्रीय औसत से 46 प्रतिशत अधिक है, का उल्लेख करते हुए सरकार ने वर्ष 2026–27 के लिए 25,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण लक्ष्य तथा शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है। राज्य सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश की “दूध राजधानी” के रूप में स्थापित करना है।



