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नैकॉफ को बकाया भुगतान का रजिस्ट्रार ने दिया आदेश

सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार विवेक अग्रवाल ने नैकॉफ को आदेश दिया है कि वह एनसीडीसी को ब्याज के साथ छह महीने के भीतर मूल राशि चुकाये। उन्होंने एनसीडीसी से पेनाल्टी  माफ करने को कहा है।

बता दें कि दिल्ली स्थित “नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर्स प्रोक्योरमेंट, प्रोसेसिंग ऐंड रिटेलिंग को-ऑप ऑफ इंडिया” (नैकॉफ) के विरुद्ध एनसीडीसी ने ऋण डिफॉल्ट से जुड़ा एक मामला केंद्रीय रजिस्ट्रार के समक्ष दर्ज कराया था और इस मामले पर सुनवाई करते हुए अग्रवाल ने नैकॉफ को छह महीने के भीतर ऋण के साथ-साथ ब्जाज चुकाने को कहा है।

इस मामले पर सुनवाई पिछले महीने हुई थी, जिसमें ललित गोयल, मुख्य निदेशक; प्रतीक मिश्र, सहायक निदेशक एनसीडीसी से और नैकॉफ से विपन के कोहली, जीएम (प्रशा.) और सूरज रावत, सहायक प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

विवेक अग्रवाल ने कहा है, “सहकारी आंदोलन की भावना के अनुरूप, एनसीडीसी को नैकॉफ पर लगी पेनाल्टी  को माफ करना होगा ताकि नैकॉफ मूलधन का भुगतान ब्याज के साथ 6 महीने के भीतर करे सके”।

केंद्रीय रजिस्ट्रार के ऑफिस से जारी एक ऑर्डर शीट के मुताबिक, “नैकॉफ के प्रतिनिधि ने अनुरोध किया है कि यदि ब्याज पर पेनाल्टी माफ की जाती है तो महासंघ 6 महीने के भीतर शेष भुगतान कर देगा। एनसीडीसी के प्रबंधक ने बताया कि पेनाल्टी एनसीडीसी की नीति के अनुसार है”।

“एनसीडीसी के प्रबंधक ने बताया कि नैकॉफ ने झारखंड राज्य में खरीद के लिए एनसीडीसी से ऋण लिया है। नैकॉफ के महाप्रबंधक ने निवेदन किया कि झारखंड राज्य में उनके दावे अभी भी लंबित हैं और विवाद न्यायाधीन है। कोर्ट केस की वजह से रकम चुकाने में प्रतिबंध लगा और नैकॉफ की भुगतान क्षमता में बाधा उत्पन्न हुई है। इन बाधाओं के बावजूद, नैकॉफ ने इस प्राधिकरण के समक्ष सुनवाई के दौरान 7 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है”।

आदेश में आगे पठित है, “नैकॉफ के प्रतिनिधि ने अनुरोध किया कि वे अपने राजस्व और कोष से 6 महीने के भीतर किस्तों में एनसीडीसी को ब्याज के साथ पूरी राशि का भुगतान करेंगे लेकिन उन्होंने आगे अनुरोध किया कि भुगतान में देरी के कारण लगाया गया जुर्माना/दंडात्मक (पेनाल्टी) ब्याज माफ किया जाये”।

मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद, सेंट्रल रजिस्ट्रार ने नैकॉफ को 6 महीने के भीतर पूरी मूल राशि ब्याज सहित चुकाने को कहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि नैकॉफ निर्देश के अनुसार भुगतान करने में विफल रहता है तो एमएससीएस अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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