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एनसीयूआई: जीसी करेगा चुनाव कार्यक्रम पर सरकार का इंतजार

देश की शीर्ष सहकारी संस्था एनसीयूआई ने मंगलवार को अपनी गवर्निंग काउंसिल की बैठक का आयोजन किया, जिसका मुख्य एजेंडा संस्था के आगामी चुनाव पर चर्चा करना था। हालांकि कोविड-19 के कारण कोई विकल्प ढंढूने में काफी कठिनाई हो रही है, बैठक में सहकारी नेताओं ने इस मुद्दे को हल करने के लिये गहन विचार विमर्श किया।

बता दें कि एनसीयूआई के वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और एमएससीएस अधिनियम, 2002 में कोविड जैसे संकट से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

मंगलवार को हुई गवर्निंग काउंसिल की बैठक में जल्द से जल्द चुनाव कराने का फैसला लिया गया। बैठक में दिलीप संघानी सहित अधिकांश सदस्यों ने भाग लिया। संघानी, बी एस नकई की जगह लेने के बाद पहली बार इफको का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। गवर्निंग काउंसिल ने इस संदर्भ में मंत्रालय को पत्र लिखने का फैसला लिया है।

इस बीच जीसी सदस्यों में से एक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, वे लोग मंत्रालय से दिशा-निर्देश चाहते हैं। “हमें यह भी डर है कि यदि हम इस मुद्दे को नहीं उठाते हैं, तो सरकार हमें डिफाल्टर घोषित कर सकती है और स्वयं कोई निर्णय ले सकती है, जो कि शीर्ष निकाय के लिए एक स्वागत योग्य कदम नहीं होगा”, उन्होने रेखांकित किया।

इससे पहले, एनसीयूआई के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ चंद्र पाल सिंह यादव ने विश्वास व्यक्त किया था कि एनसीयूआई का चुनाव 20 सितम्बर के आसपास होगा। यादव अनुमान लगा रहे थे कि 14 जुलाई को जीसी की बैठक होने तक मंत्रालय से कुछ दिशा-निर्देश आएंगे।

गवर्निंग काउंसिल की बैठक में चुनाव कराने का निर्णय लेने पर भी 15 सितंबर तक चुनाव नहीं हो सकते हैं क्योंकि चुनाव कराने के लिये साठ दिनों की नोटिस अवधि की आवश्यकता होती है”, यादव ने बताया।

बोर्ड की बैठक में कोई तारीख निश्चित नहीं हो सकी और सरकार से निर्णय आने तक इंतजार करने का फैसला किया गया, इसलिए निवर्तमान अध्यक्ष द्वारा सुझाए गयी सितंबर की तारीख तक चुनाव नहीं हो सकते हैं।

एनसीयूआई को मतदाता सूची तैयार करने और बीच की अवधि में बुनियादी तथ्य को समझने की आवश्यकता होगी, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति सबसे ज्यादा मायने रखती है। इससे पहले, सेंट्रल रजिस्ट्रार के कार्यालय ने संभावित आरओ का एक पैनल भेजा था जिसे बाद में एक नए परिपत्र द्वारा निरस्त कर दिया गया था।

नए सर्कुलर से सहकारी नेताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है क्योंकि ऐसा लगता है कि एनसीयूआई जैसे राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों की तुलना में यह बहुराज्यीय सहकारी समितियों पर अधिक लक्षित है।

“बहु-राज्य सहकारी समितियों और बैंकों के निदेशक मंडल के चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर के पैनल” शीर्षक से परिपत्र में उल्लेख है, “सभी मल्टी स्टेट सहकारी समितियों/बैंकों के बोर्ड समितियों/बैंकों के चुनाव के लिए सेवारत अधिकारियों के निम्नलिखित पैनल से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) की नियुक्ति कर सकते हैं:

क. वर्तमान सहायक रजिस्ट्रार (सहकारी) या जिले का उप-रजिस्ट्रार (सहकारिता) जहां सोसायटी/बैंक का मुख्य कार्यालय है;

ख. राज्य के सहकारिता विभाग के उप-रजिस्ट्रार (सहकारिता) रैंक के बराबर या उससे ऊपर का कोई भी अधिकारी जहां सोसायटी/बैंक का मुख्य कार्यालय है;

सी. जिला कलेक्टर या उनके द्वारा नामित अन्य अधिकारी जो उप-कलेक्टर/ एसडीएम रैंक से नीचे का नहीं हो, जहां सोसायटी/बैंक का मुख्य कार्यालय है;

डी. चीनी आयुक्त कार्यालय से एक अधिकारी जो उप-आयुक्त के पद से नीचे का  नहीं हो।

एनसीयूआई और अन्य राष्ट्रीय सहकारी निकायों जैसे मामलों के लिए परिपत्र मौन है।

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