
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने सहकारी क्षेत्र में नवाचार और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए ‘सहकार इनोवेशन स्कीम’ (एसआईएस) शुरू की है। इस अनुदान आधारित योजना का उद्देश्य प्राथमिक सहकारी समितियों को नए विचारों और परियोजनाओं को व्यवहारिक एवं टिकाऊ उद्यमों में बदलने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
वित्त वर्ष 2025-26 में शुरू की गई इस योजना के तहत पात्र सहकारी समितियों को नवाचार, व्यवहारिकता और प्रभाव वाली परियोजनाओं के लिए 100% अनुदान, अधिकतम 25 लाख रुपये तक दिया जाएगा। अतिरिक्त वित्तीय जरूरत होने पर एनसीडीसी की ओर से ऋण सहायता का प्रावधान भी किया गया है।
योजना के तहत नई तकनीकों को अपनाने, नवीन उत्पाद एवं सेवाएं विकसित करने, नए कारोबारी मॉडल तैयार करने, बाजार से बेहतर जुड़ाव बनाने और टिकाऊ समाधान विकसित करने वाली परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
एनसीडीसी के अनुसार, जमीनी स्तर की सहकारी समितियों के पास कई बार नए और उपयोगी विचार होते हैं, लेकिन पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण वे उन्हें बड़े स्तर पर लागू नहीं कर पातीं। एसआईएस के माध्यम से इस वित्तीय बाधा को कम करने में मदद मिलेगी और समितियां अपने संचालन को आधुनिक बनाने, तकनीक अपनाने तथा नए क्षेत्रों में विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।
इस योजना का लाभ कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और ग्रामीण सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली सहकारी समितियों को मिल सकता है। डिजिटल समाधान, मूल्यवर्धन, बेहतर उत्पादन प्रणाली, नवीन उत्पाद एवं सेवाओं तथा टिकाऊ कारोबारी प्रक्रियाओं से जुड़ी परियोजनाएं इसके दायरे में आ सकती हैं।
यह पहल एनसीडीसी के सहकारी क्षेत्र में उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। इससे पहले एनसीडीसी की ‘युवा सहकार’ जैसी पहलें भी नवाचार आधारित नई सहकारी समितियों और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करती रही हैं।
सहकार इनोवेशन स्कीम के जरिए एनसीडीसी का लक्ष्य सहकारी समितियों को पारंपरिक गतिविधियों से आगे बढ़ाकर आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ कारोबारी समाधान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे जमीनी स्तर पर सहकारी संस्थाओं की आर्थिक क्षमता मजबूत होने के साथ ग्रामीण विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।



