
सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि भारत के सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए ‘कोऑपरेशन अमंग कोऑपरेटिव्स’ की अवधारणा को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय, पेशेवर प्रबंधन और मजबूत सहकारी बैंक ही आत्मनिर्भर एवं सशक्त सहकारिता क्षेत्र की आधारशिला हैं।
डॉ. भूटानी ने ये बातें नई दिल्ली में के. के. त्रिपाठी एवं अन्य लेखकों द्वारा लिखित पुस्तक ‘कोऑपरेटिव मैनेजमेंट–द इंडियन पर्सपेक्टिव’ के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने बताया कि पहले अधिकांश सहकारी संस्थाएं अपने बैंक खाते वाणिज्यिक बैंकों में संचालित करती थीं, लेकिन सहकारिता मंत्रालय के प्रयासों से बड़ी संख्या में इन खातों को सहकारी बैंकों में स्थानांतरित किया गया। इससे करीब 20 हजार करोड़ रुपये सहकारी बैंकिंग प्रणाली में आए, जिससे सहकारी बैंकों की वित्तीय क्षमता मजबूत हुई।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मिलकर सहकारी संस्थाओं को अधिक बैंकिंग लाइसेंस दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार, मजबूत सहकारी बैंक वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
डॉ. भूटानी ने कहा कि ‘कोऑपरेशन अमंग कोऑपरेटिव्स’ की शुरुआत गुजरात के दो जिलों में पायलट परियोजना के रूप में की गई थी। इसके सफल परिणामों के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया गया। इसी मॉडल के आधार पर मौजूदा सहकारी संस्थाओं की भागीदारी से पांच नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि अब इथेनॉल उत्पादन, डेयरी, चीनी उद्योग, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में भी सहकारी मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सहकारिता सचिव ने बताया कि मंत्रालय ने देशभर की बीमार सहकारी चीनी मिलों के पुनर्जीवन के लिए सभी संबंधित पक्षों से जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि गुजरात में तीन सहकारी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने में सफलता मिली है, जो समयबद्ध हस्तक्षेप और समन्वित प्रयासों का सकारात्मक उदाहरण है।
उन्होंने सहकारी संस्थाओं में भाई-भतीजावाद पर चिंता जताते हुए कहा कि सहकारिता क्षेत्र को पेशेवर प्रबंधन, योग्यता आधारित नेतृत्व और पारदर्शी प्रशासन अपनाना होगा, ताकि इसकी विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनी रहे।
डॉ. भूटानी ने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को ग्रामीण सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। विभिन्न पहलों के तहत अब तक 60 हजार से अधिक पैक्स को सुदृढ़ किया जा चुका है और अगले तीन वर्षों में इनकी संख्या बढ़ाकर करीब दो लाख करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ग्रामीण नागरिकों के लिए अनेक सरकारी एवं सहकारी सेवाएं पैक्स के माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
उन्होंने ‘कोऑपरेटिव मैनेजमेंट–द इंडियन पर्सपेक्टिव’ को सहकारिता आंदोलन की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कृति बताते हुए कहा कि इसमें प्रस्तुत विचार देश में सहकारिता आधारित विकास के अगले चरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



