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केंद्रीय बजट 2026–27 को सहकारी नेताओं का व्यापक समर्थन

केंद्रीय बजट 2026-27 पर देश की प्रमुख सहकारी संस्थाओं के नेताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने कहा कि बजट कृषि और सहकारी आंदोलन को सशक्त करने के लिए सरकार की दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने एआई आधारित मृदा परीक्षण, कृषि ऋण के विस्तार, डिजिटल कृषि बाज़ारों और पशुधन क्षेत्र के आधुनिकीकरण जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कदम किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने अंतर-सहकारी लाभांश पर कर राहत और अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी महासंघों को दी गई कर छूट का भी स्वागत किया, जिसे उन्होंने सहकारी संस्थाओं की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

जीसीएमएमएफ के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि कृषि, डिजिटल सशक्तिकरण और सहकारिता पर निरंतर जोर से किसान-स्वामित्व वाली संस्थाओं को लाभ होगा और उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्ति में मदद मिलेगी। उन्होंने बजट को दूरदर्शी बताया, हालांकि यह भी रेखांकित किया कि प्रस्तावों को ठोस लाभ में बदलने के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन आवश्यक होगा।

आईसीए–एशिया पैसिफिक के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सहकारी नेता डॉ. चंद्र पाल सिंह यादव ने भी बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सहकारी विकास की जिम्मेदारी निभा रहे यादव ने कहा कि सहकारिता के विकास का उभरता मॉडल उत्साहजनक है और पड़ोसी देशों के लिए भी सकारात्मक संकेत देता है।

एनसीयूएफडीसी के अध्यक्ष ज्योतिंद्र मेहता ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं के बीच यह बजट भारत की विकास यात्रा और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है। उन्होंने सहकारिता मंत्रालय के लिए बढ़े हुए बजटीय आवंटन और नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के लिए 450 करोड़ रुपये के समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सहकारी निर्यात और बाज़ार तक पहुंच मजबूत हो सकती है। उन्होंने अंतर-सहकारी लाभांश पर कर राहत, पशु आहार और कपास बीज पर कर कटौती की अवधि बढ़ाने, स्वयं सहायता समूहों को राहत तथा बैंकिंग पर उच्चस्तरीय समिति के प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, साथ ही यह जोड़ा कि इन उपायों की सफलता प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

नाफेड के अध्यक्ष जेठाभाई भरवाड़ ने कहा कि बजट कृषि और सहकारी ढांचे को मजबूती प्रदान करता है।

नेफकार्ड के अध्यक्ष डोलर कोटेचा ने कहा कि बजट प्रौद्योगिकी आधारित पहलों और ग्रामीण व शहरी सहकारी बैंकों के समर्थन के माध्यम से कृषि और सहकारी वित्त को समावेशी विकास के प्रमुख चालक के रूप में सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि ऋण विस्तार और वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर समयबद्ध क्रियान्वयन और बेहतर समन्वय जरूरी होगा।

महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की प्रशासनिक बोर्ड के अध्यक्ष विद्याधर अनासकर ने कहा कि बजट में प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहनों की तुलना में संरचनात्मक और संस्थागत सुधारों पर अधिक ध्यान दिया गया है। उन्होंने बैंकिंग पर उच्चस्तरीय समिति और डिजिटल सहकारी सेवा केंद्रों जैसे प्रस्तावों को शासन व्यवस्था और दक्षता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया, साथ ही क्रियान्वयन के दौरान सहकारी सिद्धांतों और राज्यों की स्वायत्तता की रक्षा पर जोर दिया।

एसवीसी कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक रविंदर सिंह ने कहा कि बजट एमएसएमई क्षेत्र पर सरकार के फोकस को मजबूत करता है, विशेषकर टीआरईडीएस जैसे प्लेटफॉर्म और प्राप्ति-आधारित वित्तपोषण को बढ़ावा देने के उपायों के माध्यम से। उन्होंने कहा कि इससे सहकारी बैंकों के लिए महिलाओं द्वारा संचालित और लघु उद्यमों को कार्यशील पूंजी समाधान प्रदान करने के नए अवसर बनेंगे, बशर्ते जोखिम प्रबंधन संतुलित रखा जाए।

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