
केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि देश में कृषि क्षेत्र को दिया गया कुल बकाया संस्थागत ऋण 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 31.34 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह आंकड़ा देशभर में खेती से जुड़ी गतिविधियों के लिए बढ़ते ऋण प्रवाह को दर्शाता है।
सांसद राजा ए के प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार कुल कृषि ऋण में फसल ऋण 16.34 लाख करोड़ रुपये और टर्म लोन 15.00 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं। इस प्रकार ग्राउंड लेवल क्रेडिट के तहत कृषि क्षेत्र में कुल बकाया ऋण 31,34,807.42 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
नाबार्ड के ऑल इंडिया रूरल फाइनेंशियल इन्क्लूजन सर्वे 2021-22 के अनुसार देश के लगभग 55 प्रतिशत कृषि परिवारों ने किसी न किसी रूप में ऋण सुविधा का लाभ लिया है। सर्वे के मुताबिक किसान मुख्य रूप से पूंजी निवेश, कार्यशील पूंजी और अन्य कृषि संबंधी खर्चों को पूरा करने के लिए ऋण लेते हैं, जिससे कृषि गतिविधियों को बनाए रखने और उनका विस्तार करने में मदद मिलती है।
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु में सबसे अधिक 5.06 लाख करोड़ रुपये का बकाया कृषि ऋण है। इसके बाद आंध्र प्रदेश (3.75 लाख करोड़ रुपये) और महाराष्ट्र (3.07 लाख करोड़ रुपये) का स्थान है। अन्य प्रमुख राज्यों में उत्तर प्रदेश (2.30 लाख करोड़ रुपये), कर्नाटक (2.10 लाख करोड़ रुपये) और राजस्थान (1.92 लाख करोड़ रुपये) शामिल हैं।
मंत्री ने बताया कि किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें कृषि ऋण प्रवाह के लिए वार्षिक लक्ष्य तय करना, बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के मानदंड, तथा किसान क्रेडिट कार्ड और संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के माध्यम से सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराना शामिल है।
इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार कई दीर्घकालिक योजनाएं भी चला रही है। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कृषोन्नति योजना और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना शामिल हैं, जो किसानों को आय सहायता, फसल बीमा और विकास सहायता प्रदान करती हैं।
कृषि ऋण व्यवस्था में सहकारी बैंक और प्राथमिक कृषि ऋण समितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये संस्थाएं ग्रामीण स्तर पर किसानों तक कृषि ऋण पहुंचाने में अहम कड़ी हैं।
नाबार्ड के नीतिगत समर्थन और पुनर्वित्त व्यवस्था के साथ राज्य सहकारी बैंक, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और पैक्स से मिलकर बना सहकारी ऋण ढांचा देशभर में विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को सुलभ और किफायती कृषि ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।



