
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बाढ़, चक्रवात, सूखा तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित उधारकर्ताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। प्रस्तावित ढांचा उन ग्राहकों को सहायता प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जिनकी ऋण चुकाने की क्षमता प्राकृतिक आपदाओं के कारण अस्थायी रूप से प्रभावित हो जाती है।
ये मसौदा दिशानिर्देश ग्रामीण सहकारी बैंकों और अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों पर लागू होंगे तथा इनका उद्देश्य सभी विनियमित इकाइयों में राहत उपायों में एकरूपता लाना है। सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ढांचा 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जाने का प्रस्ताव है।
मसौदा मानकों के अनुसार, वे उधारकर्ता राहत के पात्र होंगे जिनके ऋण खाते प्राकृतिक आपदा की तिथि पर मानक श्रेणी में वर्गीकृत हों और जिनमें 30 दिनों से अधिक की बकाया देरी न हो। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामान्यतः संतोषजनक पुनर्भुगतान रिकॉर्ड रखने वाले उधारकर्ता प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न अल्पकालिक व्यवधानों के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हों।
आरबीआई ने बैंकों को पात्र उधारकर्ताओं के लिए समाधान योजनाएं तैयार करने में अधिक लचीलापन देने का प्रस्ताव किया है। राहत उपायों में ऋण पुनर्निर्धारण, किस्तों पर अधिस्थगन प्रदान करना अथवा अतिरिक्त वित्त स्वीकृत करना शामिल हो सकता है, जो उधारकर्ता की व्यवहार्यता के आकलन पर आधारित होगा। ये उपाय संबंधित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति अथवा जिला परामर्श समिति की सिफारिशों के अनुरूप लागू किए जाएंगे।
समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए मसौदा दिशानिर्देशों में स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। बैंकों को प्राकृतिक आपदा की घोषणा के 45 दिनों के भीतर समाधान प्रक्रिया प्रारंभ करनी होगी, जबकि प्रक्रिया प्रारंभ होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर समाधान योजना को लागू करना अनिवार्य होगा।
महत्वपूर्ण रूप से, इस ढांचे के अंतर्गत पुनर्गठित किए गए ऋण खाते, दिशानिर्देशों के अनुपालन की शर्त पर, मानक श्रेणी में ही वर्गीकृत बने रहेंगे। इसके अतिरिक्त, वे खाते जो आपदा के बाद लेकिन समाधान योजना के क्रियान्वयन से पहले गैर-निष्पादित परिसंपत्ति बन गए हों, उन्हें समाधान योजना लागू होने पर पुनः मानक श्रेणी में उन्नत किया जा सकेगा।
दिशानिर्देशों में आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की निरंतरता पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत बैंक अस्थायी शाखाएं, मोबाइल बैंकिंग इकाइयां, एक्सटेंशन काउंटर संचालित कर सकते हैं तथा एटीएम सेवाओं की शीघ्र बहाली के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं।
आरबीआई ने इन मसौदा दिशानिर्देशों पर 17 फरवरी 2026 तक हितधारकों और आम जनता से सुझाव एवं टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।



