
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी), बनास मिल्क यूनियन (बनास डेयरी) और सुजुकी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत गुजरात के बनासकांठा जिले में 75 मीट्रिक टन प्रतिदिन (एमटीपीडी) क्षमता का गोबर आधारित बायोगैस संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
यह समझौता बनासकांठा के बुखाला गांव में 100 एमटीपीडी कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र के उद्घाटन के अवसर पर किया गया, जिसका उद्घाटन गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया। यह कार्यक्रम सहकारिता क्षेत्र के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार की दिशा में राज्य के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा।
समझौता ज्ञापन पर बनास मिल्क यूनियन के प्रबंध निदेशक संग्राम चौधरी, सुजुकी आर एंड डी सेंटर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक केनिचिरो टोयोफुकु तथा एनडीडीबी के ग्रुप हेड (ईएस) शशिकुमार बी. एन. ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष एवं बनास मिल्क यूनियन के अध्यक्ष शंकर चौधरी तथा गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतू वाघाणी सहित डेयरी, सहकारिता और ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
प्रस्तावित बायोगैस संयंत्र सहकारी डेयरी नेटवर्क से प्राप्त गोबर का उपयोग कर कंप्रेस्ड बायोगैस और उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद का उत्पादन करेगा। इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, अपशिष्ट प्रबंधन सुदृढ़ होगा और डेयरी किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर सृजित होंगे, जिससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी।
यह सहयोग सतत विकास और सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने की दिशा में एनडीडीबी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दूध संघों और तकनीकी भागीदारों के साथ मिलकर एनडीडीबी बायोगैस उत्पादन के विस्तार, जलवायु कार्रवाई तथा राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
एनडीडीबी देशभर के सहकारी दुग्ध संघों के साथ मिलकर कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और परामर्श सेवाएं प्रदान कर रहा है, जो किसानों की आय वृद्धि, अपशिष्ट के कुशल उपयोग तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय की प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।



