
शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए अम्ब्रेला संगठन के रूप में स्थापित नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनयूसीएफडीसी) ने 300 करोड़ रुपये की न्यूनतम नियामकीय पूंजी सफलतापूर्वक जुटाने के बाद पूर्ण रूप से संचालन शुरू कर दिया है। इसे सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में हाल ही में दिए गए उत्तर में इस विकास की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार यूसीबी क्षेत्र को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि ये बैंक देश की वित्तीय प्रणाली का अहम हिस्सा हैं।
एनयूसीएफडीसी की स्थापना लंबे समय से उठ रही उस मांग के मद्देनजर की गई है, जिसमें यूसीबी के सामने मौजूद संरचनात्मक, तकनीकी और अनुपालन संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए एक समर्पित संस्था की आवश्यकता जताई गई थी। देशभर में हजारों शाखाओं के माध्यम से लाखों जमाकर्ताओं को सेवा देने वाले ये बैंक ऊंची अनुपालन लागत, बिखरी हुई तकनीकी प्रणालियों और साझा सेवाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझते रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के विशेषज्ञ समूहों ने एक दशक से अधिक समय पहले ऐसे केंद्रीय संगठन की सिफारिश की थी। नई अम्ब्रेला संस्था को एक केंद्रीकृत मंच के रूप में विकसित किया गया है, जो यूसीबी को तेजी से बदलते वित्तीय परिदृश्य में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक संसाधन और सेवाएं उपलब्ध कराएगी।
नई दिल्ली में पंजीकृत कार्यालय और मुंबई में कॉरपोरेट कार्यालय वाली एनयूसीएफडीसी, आरबीआई के साथ एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में पंजीकृत है। यह संस्था क्षेत्र के लिए एक स्व-नियामक संगठन के रूप में भी कार्य करेगी।
एनयूसीएफडीसी ने गैर-फंड आधारित सेवाएं, जैसे साइबर बीमा, विधिक परामर्श और जोखिम-आधारित आंतरिक लेखा परीक्षा सेवाएं, पहले ही शुरू कर दी हैं। आने वाले महीनों में वित्तीय सहायता और अन्य फंड-आधारित उत्पाद शुरू किए जाने की योजना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एनयूसीएफडीसी का संचालन में आना शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। ये बैंक परंपरागत रूप से स्थानीय समुदायों, सूक्ष्म उद्यमों और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को वित्तीय सेवाएं प्रदान कर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते रहे हैं।



