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फिशकॉफेड में प्रशासक की नियुक्ति; अधिकारियों की स्थिति की होगी समीक्षा

राष्ट्रीय मत्स्य सहकारी महासंघ लिमिटेड (फिशकॉफेड) में वैधानिक शासन और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली की बहाली के लिए केंद्र सरकार ने निर्णायक कदम उठाते हुए प्रशासक की नियुक्ति की है। यह नियुक्ति दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की गई है।

सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार के कार्यालय की सलाह पर तथा दिल्ली हाईकोर्ट के 19 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुसार, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने सुभाष चंद्र, निदेशक (मत्स्य), IOFS-2003 को बहु-राज्य सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 (संशोधित 2023) की धारा 123 के तहत फिशकॉफेड का प्रशासक नियुक्त किया है। प्रशासक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के स्थान पर कार्य करेंगे।

प्रशासक का कार्यकाल छह माह का होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर अधिकतम एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। यह दायित्व उन्हें बिना किसी अतिरिक्त मानदेय के सौंपा गया है।

प्रशासक की नियुक्ति के साथ ही फिशकॉफेड में कार्यरत पी.के. चौधरी और एस.एस. महौर की सेवा-स्थिति और निरंतरता पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। आरोप है कि दोनों अधिकारी बिना किसी विधिवत अधिसूचित सेवा-विस्तार के संस्था में कार्यरत रहे।

फिशकॉफेड के कर्मचारियों के एक वर्ग ने यह भी आरोप लगाया है कि चौधरी और महौर ने चुनाव प्रक्रिया में कथित रूप से हेरफेर किया तथा बदले में पदोन्नति और सेवा-विस्तार प्राप्त किए। दोनों अधिकारी वर्तमान में फिशकॉफेड से जुड़े चुनाव संबंधी मध्यस्थता विवाद में पक्षकार हैं।

गौरतलब है कि मध्यस्थ ने 15 दिसंबर 2025 के आदेश के माध्यम से दोनों अधिकारियों को कार्य करने से रोक दिया था। हालांकि, इस आदेश के विरुद्ध टी.पी. राव डोरा एवं अन्य द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2025 को आदेश में आंशिक संशोधन किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी सेवाएं जारी रहती हैं, तो वे पूरी तरह प्रशासक की स्वीकृति और पर्यवेक्षण के अधीन होंगी।

प्रशासक की नियुक्ति से फिशकॉफेड में सामान्य प्रशासनिक कार्यों के पुनर्स्थापन की भी उम्मीद जताई जा रही है। भारतीय सहकारिता से बातचीत में सहायक निदेशक एम.ए. खान सहित अन्य अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि अब उन्हें कार्यालय में उपस्थित होकर अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन करने की अनुमति मिलेगी। खान के अनुसार, उन्हें कथित रूप से चौधरी और महौर द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन से रोका गया था।

उल्लेखनीय है कि फिशकॉफेड की स्थापना वर्ष 1980 में हुई थी और 1982 में इसका पुनर्नामकरण किया गया। यह देश-स्तर की शीर्ष मत्स्य सहकारी संस्था है, जो मछुआरों के कल्याण, क्षमता निर्माण, मत्स्य सहकारी आंदोलन को बढ़ावा देने तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ मत्स्य विकास कार्यक्रमों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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