
दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “को-ऑप कुंभ 2025” का मंगलवार को नई दिल्ली में उत्साहपूर्ण समापन हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय सहकारिता नीति समिति के अध्यक्ष सुरेश प्रभु रहे।
इस अवसर पर नेफकॉब अध्यक्ष लक्ष्मी दास, कर्नाटक सरकार में मंत्री एच. के. पाटिल, मिलिंद काले, ज्योतिन्द्र मेहता और ओ. पी. शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए नेफकॉब अध्यक्ष लक्ष्मी दास ने सुरेश प्रभु के सहकारिता क्षेत्र में अमूल्य योगदान का उल्लेख किया और दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान हुई रचनात्मक चर्चाओं को ऐतिहासिक बताया।
अपने मुख्य संबोधन में सुरेश प्रभु ने “कुंभ” और “सहकारिता आंदोलन” के बीच सांकेतिक समानता स्थापित करते हुए कहा, “कुंभ में हम मोक्ष की खोज करते हैं, और यदि सच्चा मोक्ष चाहिए, तो सहकारिता आंदोलन से जुड़ना ही उसका मार्ग है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा सहकारिता मंत्रालय की स्थापना एक दूरदर्शी कदम है, जिसने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है। प्रभु ने कहा कि सहकारिता राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गोवा जैसे राज्यों ने अपनी सहकारिता नीतियों पर कार्य प्रारंभ कर दिया है और अन्य राज्यों से भी इसी दिशा में पहल करने का आग्रह किया।
सुरेश प्रभु ने सहकारिता क्षेत्र के लिए नए अवसरों का उल्लेख करते हुए बांस-आधारित उद्योगों और सतत विकास से जुड़ी पहलों में निवेश का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं और महिलाओं की व्यापक भागीदारी पर बल देते हुए कहा, “लोग कहते हैं, कॉफी पर सब कुछ हो सकता है- मैं कहता हूँ, सहकारिता से सब कुछ संभव है।”
नेफकॉब उपाध्यक्ष मिलिंद काले ने इस अवसर पर “दिल्ली घोषणा 2025” प्रस्तुत की। इस घोषणा में अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों और क्रेडिट सोसायटियों से अनुपालन को सुदृढ़ करने, पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल प्रशासन को अपनाने का आह्वान किया गया।
घोषणा में साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन, ग्रीन फाइनेंस और सामाजिक उत्तरदायित्व को सहकारिता क्षेत्र की नई प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।
उल्लेखनीय है कि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारत के अर्बन कोऑपरेटिव बैंकिंग सेक्टर के डिजिटल और संरचनात्मक रूपांतरण के लिए विस्तृत रोडमैप जारी किया था। उन्होंने “सहकार डिजी-पे” और “सहकार डिजी-लोन” प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया और घोषणा की कि दो लाख से अधिक आबादी वाले प्रत्येक शहर में एक अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना की जाएगी।
सम्मेलन में ज्योतिन्द्र मेहता ने शाह की “वन टाउन, वन यूसीबी” अवधारणा का समर्थन किया। डॉ. एच. के. पाटिल ने सेक्शन 80(पी)(4) की समीक्षा और सुधारवादी नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि उदय जोशी ने क्रेडिट कोऑपरेटिव्स के लिए आत्म-नियमन की वकालत की। रबिन्द्र अग्रवाल ने प्रस्तावित सहकारी विश्वविद्यालय के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात कही।
कार्यक्रम का समापन ओ. पी. शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



