
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा है कि यदि केरल सरकार औपचारिक प्रस्ताव भेजती है, तो केंद्र सरकार मत्स्यफेड को अमूल की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्था के रूप में विकसित करने के लिए सहयोग देने को तैयार है।
कुरियन ने यह बात तिरुवनंतपुरम के पास विजिंजम स्थित आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान में आयोजित मत्स्य शक्ति परियोजना के तहत एक कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कही। यह कार्यशाला प्रधानमंत्री विकास योजना के अंतर्गत आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य कौशल विकास, उद्यमिता और संस्थागत सहयोग के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में आजीविका को मजबूत करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि सहकारी संस्थाओं ने भारत में ग्रामीण और विभिन्न क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यदि केरल सरकार मत्स्यफेड के व्यापक विकास की योजना पेश करती है, तो केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान करते हुए इसे डेयरी क्षेत्र की सहकारी सफलता की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने में मदद करेगी।
कुरियन ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र में सतत और सार्थक विकास के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। सहकारी संस्थाएं मछुआरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और उनके उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सहकारी नेटवर्क के विस्तार और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र भी डेयरी सहकारिताओं की तरह उत्पादकों को सशक्त बनाने और मजबूत राष्ट्रीय ब्रांड विकसित करने में सफल हो सकता है।
कार्यक्रम के तहत लगभग 690 लाभार्थियों को मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें हैचरी उत्पादन, केज कल्चर आधारित मत्स्य पालन, एक्वाकल्चर प्रबंधन तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण शामिल है, जिससे तटीय क्षेत्रों में उत्पादकता और आय में वृद्धि हो सकेगी।
कुरियन ने कहा कि मत्स्य शक्ति जैसी पहलें यह दिखाती हैं कि शोध संस्थानों, सरकारी योजनाओं और सहकारी ढांचे के समन्वय से एक मजबूत मत्स्य पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उचित संस्थागत सहयोग और समन्वित नीतियों के माध्यम से भारत का मत्स्य क्षेत्र तटीय आर्थिक विकास और आजीविका सुरक्षा का बड़ा आधार बन सकता है।



