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बिहार के सहकारिता क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी, एनसीडीसी ने बढ़ाया साथ

बिहार में सहकारिता क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और इसे किसानों-केंद्रित, भरोसेमंद और वित्तीय रूप से सक्षम बनाने के लिए अहम कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के मुख्य सचिव प्रतय अमृत ने इस दिशा में व्यापक सुधार योजना की रूपरेखा तैयार की है।

हाल ही में आयोजित राज्य सहकारी विकास समिति की पाँचवीं बैठक में कृषि, बैंकिंग, भंडारण और संबद्ध क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय लिए गए।

मुख्य सचिव ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि सहकारी संस्थाओं को अब बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाना होगा, न कि केवल प्रशासनिक संरचना के रूप में सीमित रहना चाहिए। उन्होंने समय पर कार्यान्वयन, वित्तीय अनुशासन और केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ समन्वय को दीर्घकालीन प्रभाव के लिए अनिवार्य बताया।

बैठक में एक अहम निर्णय सकरी और राय्याम में सहकारी चीनी मिलों की स्थापना का लिया गया। प्रतय अमृत ने इसे सहकारी चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने, गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्य सचिव ने प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसाइटी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया और इन्हें सहकारी प्रणाली की आधारशिला बताया। उन्होंने पैक्स में माइक्रो-एटीएम सुविधाओं के कार्यान्वयन की योजना की समीक्षा की, जिससे ग्रामीण इलाकों में विशेषकर लघु और सीमांत किसानों के लिए बैंकिंग सेवाओं की पहुँच आसान होगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सरकारी फंड सहकारी बैंकों में जमा किए जाएँ, जिससे उनकी तरलता बढ़ेगी और कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण देने की क्षमता में सुधार होगा।

बैठक में दुनिया की सबसे बड़ी विकेन्द्रित अनाज भंडारण योजना के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि पैक्स इस योजना के केंद्र में हों, ताकि किसानों के पास भंडारण सुविधाएँ नज़दीक हों, कटाई के बाद नुकसान कम हो और सहकारी संस्थाओं को सतत राजस्व का स्रोत प्राप्त हो।

सहकारी संस्थाओं के माध्यम से क्रेडिट वितरण और व्यवसाय विकास को सुदृढ़ करने के उपायों की भी समीक्षा की गई। पैक्स के माध्यम से ऋण वितरण बढ़ाने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए वसूली तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में उपस्थित राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के प्रबंध निदेशक एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पंकज कुमार बंसल ने उन डेयरी सहकारी समितियों के तत्काल पंजीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया जो अभी तक पंजीकृत नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि एनसीडीसी की वित्तीय और तकनीकी सहायता बिहार में सहकारी परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

बैठक में लिए गए ये निर्णय स्पष्ट रूप से बिहार सरकार की ग्रामीण विकास रणनीति में सहकारी संस्थाओं को केंद्र में रखने की नीति को दर्शाते हैं।

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