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बड़ी राहत: आरबीआई ने ब्रांच स्वीकृति पर दंड-आधारित प्रतिबंध हटाए

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार की घोषणा करते हुए “एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया फॉर ब्रांच ऑथराइजेशन (ईसीबीए)” का नया ढांचा जारी किया है। नई व्यवस्था के तहत, अब शाखा खोलने पर पूर्व में लागू पेनल्टी-आधारित प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं, जो शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए लंबे समय से बाधा बने हुए थे। पहले छोटी या तकनीकी प्रकृति की पेनल्टी भी नई शाखा खोलने में रुकावट पैदा करती थीं।

नए प्रावधानों में बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत लगने वाली मौद्रिक दंड जारी रहेंगे, लेकिन ये दंड अब स्वतः ही शाखा विस्तार में अवरोध नहीं बनेंगे। बैंक यदि ईसीबीए मानकों का पालन करता है, तो उसे नई शाखाएँ खोलने की अनुमति दी जाएगी, यह पुराने ढांचे से बड़ा बदलाव है।

ईसीबीए ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए पूर्व के फाइनेंशियली साउंड एंड वेल मैनेज्ड (एफएसडब्ल्यूएम) मानदंडों को प्रतिस्थापित किया है, जबकि ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए एक समान पात्रता व्यवस्था लागू की गई है।

ईसीबीए-अनुपालन के लिए बैंक को ऑडिटेड वित्तीय विवरणों के आधार पर कई शर्तें पूरी करनी होंगी, जिनमें शामिल हैं, नियमित न्यूनतम से कम-से-कम 1% अधिक सीआरएआर बनाए रखना, नेट एनपीए को 3% से नीचे रखना, पिछले दो वित्तीय वर्षों में लाभ अर्जित करना, तथा सीआरआर/एसएलआर अनुपालन में कोई चूक न होना।

इसके अलावा, बैंक का 100% कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) पर होना अनिवार्य है। शहरी सहकारी बैंक के बोर्ड में 2025 की शासन दिशानिर्देशों के अनुसार कम-से-कम दो प्रोफेशनल निदेशक होना आवश्यक है।

आरबीआई ने निर्देश दिया है कि बैंक प्रत्येक वर्ष ईसीबीए अनुपालन की समीक्षा करें और वैधानिक ऑडिट रिपोर्ट अपनाने के 30 दिन के भीतर इसे बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करें। स्वीकृत अनुपालन स्थिति 15 दिनों के भीतर आरबीआई को भेजनी होगी। यह अनुपालन स्थिति अगले वित्तीय वर्ष की 30 सितंबर तक वैध रहेगी, जब तक कि बैंक इससे पहले गैर-अनुपालक न हो जाए।

नए प्रावधान लागू करते हुए आरबीआई ने 28 नवंबर 2025 को जारी पूर्व दिशानिर्देशों को भी निरस्त कर दिया है। पहले से निरस्त किए गए निर्देश भी नए ढांचे के तहत अमान्य ही रहेंगे।

सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधि, विशेष रूप से नेफकॉब से जुड़े नेताओं ने लंबे समय से आरबीआई के समक्ष दंड-आधारित प्रतिबंध हटाने का मुद्दा उठाया था। अब यह मांग स्वीकार कर ली गई है। वर्षों से बैंक यह तर्क देते रहे थे कि पेनल्टी-आधारित अयोग्यता शाखा विस्तार में अनावश्यक बाधा बनती है।

नया ईसीबीए ढांचा शाखा स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने, नियामकीय स्पष्टता लाने और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं के विस्तार को गति देगा।

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