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कोई अनुताप, कोई इच्छा नहीं: इफको के प्रबंध निदेशक का दार्शनिक चिंतन

नातू पटेल से मृदा परिक्षण तक और सब्सिडी के सीधे हस्तांतरण से लेकर नई पीढ़ी के लिए सहकारी नेतृत्व को तैयार करने तक, डॉ उदय शंकर अवस्थी जो लाखों किसानों के चहेते है, किसानों के जीवन को सुधारने में अहम योगदान दिया है। डॉ अवस्थी ने अपनी भूमिका, अपना जीवन और अपने सपने अर्थात अपनी तमाम आंतरिक भावनाओं को भारतीय सहकारिता के साथ साझा किया है।

कुछ अंश:

भारतीय सहकारिता: इफको ने हाल ही में कई पुरस्कार बटोरे हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?

डॉ यू.एस.अवस्थी: मैं आपको सच बताऊँ तो मुझे नहीं पता की इफको ऑटो-पायलट पर है। इफको की कई इकाइयां है जो स्वतंत्र रूप से और जिम्मेदारी से कार्य करती हैं। वे अलग-अलग गतिविधियों में भाग लेते रहते हैं और उनके अच्छे प्रर्दशन पर उनको पुरस्तकृत किया जाता है लेकिन महत्तवपूर्ण यह है कि किसी को सिर्फ पुरस्कार हासिल करने के लिए कार्य नहीं करना चाहिए और यह बहुत जरूरी है कि अच्छे काम की हमेशा सराहना होनी चाहिए।

जहां तक मुझे पता है मैं केवल फूटबॉल टीम के कोच की तरह निगरानी रखता हूं। मैं मूल रूप से संकट प्रबंधन आदमी हूँ जब किसी कार्य में अर्चन आती है तो मेरी जरूरत ज्यादा बढ़ जाती है।

भारतीय सहकारिता: मृदा का संरक्षण प्रमुख चिंता का विषय है लेकिन भारत एक बहुत बड़ा देश है; क्या आपको लगता है कि आप इस बारे में अभी तक कुछ कर पाये हैं?

डॉ यू.एस.अवस्थी: आप और क्या चाहते हो; इस मुद्दे पर समाचार पत्रों के संपादकीय में भी चर्चा की जा रही है ( उन्होंने बिजनेस इंडिया के अखबार का जिक्र करते हुये कहा) अगर 6-7 साल के मेरे प्रयासों से कुछ बदलाव हुआ है तो मैं बहुत खुश हूँ। अब हर कोई इस विषय पर चर्चा कर रहा है, आम लोगों में भी जागरूकता दिखाई दे रही है। यहां तक कि पंजाब कृषि विश्वविघायल ने जैव उर्वरक को रासायनिक उर्वरक से बेहतर बताया है।

किसानों की सहकारी संस्था इफको का एमडी होने के नाते मैंने इस विषय को प्रधानमंत्री से आईसीए से लेकर यूएनओ तक से चर्चा की है। अब आम लोगों में जागरूकता दिख रही है और नई सरकार इस पर खरा उतरने  के लिए आगे बढ रही है। मेरा कर्तव्य पूरा हुआ, मुझे कोई श्रेय नहीं चाहिए। मैं नहीं चाहता कि मेरे अच्छे प्रर्दशन के लिए लोग मुझे याद करें।

यहां तक कि तुफान हमारे ऐसे क्षेत्रों को प्रभावित नहीं कर सका जहां यूरिया का कम इस्तेमाल किया जाता था और जहां यूरीया का अत्यधिक उपयोग हुआ वहां पौधों की जड़े प्रभावित हुई।

भारतीय सहकारिता: क्या किसानों को सीधा सब्सिडी प्रदान करने की आपकी मांग को सुना गया है ?

डॉ यू.एस.अवस्थी: यहां तक कि विश्व बैंक ने भी कहा है कि अगर गरीबी को खत्म करना है तो सब्सिडी का सीधा हस्तांतरण होना चाहिए। अतीत में इससे जुड़े सभी उपाय विफल हुये है क्योंकि उनमें धन की बर्बादी होती थी। अप्रत्यक्ष हस्तांतरण जो थोड़े समय के लिए होता है उसका विफल होना निश्चित है।

अब हमारे पास आधार कार्ड जो कि लगभग 67 प्रतिशत जनसंख्या के पास है। जनधन योजना के तहत भी अधिक लोगों के पास अपने बैंक खाते है।

केवल कृषि को प्रोफेंसनल तरीके से लागू करने की जरूरत है, उन्हें उसी तरह वेतन और मजदूरी प्रदान की जानी चाहिए जिस तरह आप अपने कर्मचारियों, क्लर्क या फिर प्रबंधक को प्रदान करते है। अपने ध्यान को उद्योग जगत से हटाकर कृषि क्षेत्र की तरफ केंद्रीत करने की आवश्यकता है और यह तकनीकी रूप और प्रोफेसनल तरीके से होनी चाहिए।

भारतीय सहकारिता: इफको की बोर्ड के एक निदेशक नातू पटेल को हाल ही में गुजरात स्थित गुज्कोमॉसल से हटा दिया गया हैं। बोर्ड उनके बारे में क्या सोच रही है; क्या उन्हें हटाना चाहिए?

डॉ यू.एस.अवस्थी: हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है और हमें जानकारी है कि उन्हें अभी हटाया नहीं गया है। इस विषय में कोर्ट केस चल रहा है और राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। अनिश्चितता की स्थिति है, अभी यथास्थिति बरकरार है अगर कोई स्थिति उत्पन्न होती है तो हम उससे निपटने की कोशिश करेंगे। अभी वे गुज्कोमॉसल के अध्यक्ष है।

भारतीय सहकारिता: सहकारी आंदोलन को आप वर्तमान समय में कैसे देखते हैं? आप लंबे समय से सहकारी आंदोलन से जुड़े हुये हो, क्या आपको लगता है कि सब ठीक चल रहा है?

डॉ यू.एस.अवस्थी: सहकारी नेताओं के बीच में आपसी मतभेद काफी कम हुये है। विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्रेपोरेटर मिलकर कार्य कर रहे हैं और एक संयुक्त टीम के रूप में कार्य कर रहें है। टीम के रूप में काम करने में राजनीति अाढ़े नहीं आ रही और हाल के वर्षों में यह एक सुन्दर परिवर्तन है जो दिखाई दे रहा है।

सहकारी आंदोलन की खातिर हम सबको अपने अहंकार को खत्म करना होगा। अगर सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाना है तो हमें अपने आप को तकनीकी रूप और पेशेवर ढंग से संगठित करना होगा। हालांकि अभी ऐसा धीरे-धीरे हो रहा है।

भारतीय सहकारिता: आप विश्व की सबसे बड़ी किसानों की सहकारी संस्था के एमडी है, 40 हजार सहकारी समितियों के सदस्य इफको के सदस्य हैं। क्या आपने कभी सहकारी चुनाव लड़ने पर विचार किया है या उस तरह की पहल करेंगे?

डॉ यू.एस.अवस्थी: इफको का ढांचा संविधान की तरह है जहां राष्ट्रपति भी है और प्रधानमंत्री भी है वैसे ही इफको का अध्यक्ष राष्ट्रपति की तरह है और एमडी प्रधानमंत्री की तरह है। चाहे में समाने से कार्य करूं या पक्ष से करू, महत्वपूर्ण है कि इन दोनों के बीच में संतुलन होना चाहिए। इफको गतिविधियों  में उल्लेखनीय दिखाई देता है।

चुनावी राजनीति में जाने की बात भविष्य की कोख में है और फिर लोगों को सोचना है, कार्रेपोरटर को सोचना है। मैं 1976 से इफको के साथ हूं, और पिछले 40 वर्षों से मैनें केवल सहकारिता की सांस ली और सहकारी आंदोलन का अभिन्न अंग रहा हूँ।

किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि मुझे अभी भी कोई इच्छा है और अब जिंदगी से कोई लालच नहीं है। मुझ पर यकीन कीजिये मेरे पास जो है उसी से मेैं बिलकुल संतुष्ट हूँ। मुझे लगता है कि मैनें समाज और देश के लिए जो थोड़ा सा योगदान दिया है, वह एक इंसान के रूप में मैंने अपनी भूमिका निभाई है। मुझे कोई शिकवा शिकायत नहीं है।

मैंने अपना काम किया है और काफी संतुष्ट हूं; मुझे बदले में वरिष्ठ और जूनियर, सहयोगियों से और सबों से स्नेह मिला है, मुझे और कुछ नहीं चाहिए।

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