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कुमार ने नैनो उर्वरकों को जलवायु-सहिष्णु खेती का बताया भविष्य

कर्नाटक राज्य कृषि विभाग के 113वें स्थापना दिवस के अवसर पर बेंगलुरु में “नेक्स्ट जेनरेशन नैनो उर्वरक : सतत खेती का नया युग” विषय पर एक उच्चस्तरीय तकनीकी कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में राज्यभर से वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों तथा जिला स्तरीय कृषि अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यशाला में प्रमुख सचिव (कृषि) सेल्वकुमार, कृषि आयुक्त वाई.एस. पाटिल, कृषि निदेशक डॉ. जी.टी. पुट्रा सहित सभी जिलों के संयुक्त एवं उपनिदेशक उपस्थित रहे। उनकी भागीदारी ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु उन्नत तकनीकों को अपनाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

डॉ. लक्ष्मणन ने नैनो उर्वरकों की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए बताया कि ये उर्वरक उच्च पोषक तत्व उपयोग दक्षता और सटीक आपूर्ति तंत्र के कारण रासायनिक उपयोग को कम करने, पोषक तत्वों की हानि घटाने तथा किसानों की लागत कम करने में सहायक हैं। साथ ही, इससे मिट्टी और जल प्रदूषण में भी कमी आती है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण योगेंद्र कुमार का संबोधन रहा। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक भारतीय कृषि में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकते हैं। बढ़ती लागत, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार और जलवायु-सहिष्णु समाधानों को अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने राज्य के अधिकारियों से किसानों के बीच जागरूकता और अपनाने की प्रक्रिया को तेज करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यशाला का आयोजन एसएमएम कर्नाटक के नेतृत्व में किया गया, जिसका उद्देश्य राज्य में नवाचार-आधारित कृषि परिवर्तन को गति देना है। यह आयोजन कर्नाटक में सतत, जलवायु-स्मार्ट और तकनीक-सक्षम खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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