
ऑल ओडिशा को-ऑपरेटिव लीडर्स एसोसिएशन ने ओडिशा राज्य सहकारी बैंक में कथित गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, अनधिकृत पेनल्टी भुगतानों तथा अवैध इन-चार्ज नियुक्तियों को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को एक पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने मामले की विशेष ऑडिट कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में एसोसिएशन ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार वर्तमान में ओडिशा के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, ओडिशा राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
एसोसिएशन के अनुसार, इस व्यवस्था के आंशिक (पार्ट-टाइम) स्वरूप का कथित रूप से लाभ उठाते हुए कुछ इन-चार्ज वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें सीजीएम (इन-चार्ज) और अन्य अधिकारी शामिल हैं, कानूनी स्वीकृति के बिना विभिन्न भत्तों के माध्यम से अत्यधिक पारिश्रमिक प्राप्त कर रहे हैं। संगठन का आरोप है कि ये अधिकारी ऐसे पदों पर बने हुए हैं, जिन्हें 10 सितंबर 2025 को आयोजित बैंक की प्रबंधन समिति की बैठक में स्पष्ट रूप से अस्वीकृत कर दिया गया था।
एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि आरटीजीएस बाउंस मामलों और एटीएम विवाद निपटान में विफलता के कारण बैंक को लाखों रुपये की पेनल्टी का सामना करना पड़ा है। संगठन के अनुसार, इन पेनल्टी भुगतानों से बैंक की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली, जवाबदेही और स्वीकृति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पत्र में कहा गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि इन पेनल्टी भुगतानों को कानून के अनुसार कभी प्रबंधन समिति के समक्ष रखा गया या उसकी स्वीकृति ली गई।
दस्तावेजी साक्ष्यों का हवाला देते हुए एसोसिएशन ने बताया कि 19 दिसंबर 2025 को शाम 7:06 बजे के बाद एनपीसीआई को 10.18 लाख रुपये की पेनल्टी का भुगतान किया गया। इसके बाद 20 दिसंबर 2025 को 1 लाख रुपये की अतिरिक्त पेनल्टी दी गई, जबकि इससे पहले 30 सितंबर 2023 को भी 11.80 लाख रुपये की पेनल्टी का भुगतान किया गया था। संगठन के अनुसार, अब तक कुल 22.98 लाख रुपये की पेनल्टी का भुगतान किया जा चुका है, जिससे ओडिशा राज्य सहकारी बैंक को प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान हुआ है।
एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि इन पेनल्टी राशियों को नियमित रूप से “पेनल्टी जीएल स्टेटमेंट” के तहत समायोजित किया जा रहा है, जबकि इसके लिए किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। संगठन ने यह प्रश्न भी उठाया कि ये पेनल्टी भुगतान किसके अधिकार और स्वीकृति से किए गए, क्या प्रबंध निदेशक (इन-चार्ज) और बैंक के अध्यक्ष को इसकी जानकारी थी या उन्होंने पूर्व अनुमति दी थी, और वित्त वर्ष 2023–24 के दौरान एजीसीएस ऑडिट तथा नाबार्ड ऑडिट में इतनी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं कैसे सामने नहीं आईं।
एसोसिएशन ने यह भी सवाल उठाया कि घोर लापरवाही, कर्तव्यहीनता और वित्तीय कदाचार के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक आपराधिक, अनुशासनात्मक और वसूली की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अपने पत्र में एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे ओडिशा राज्य सहकारी बैंक का स्वतंत्र विशेष ऑडिट कराने का आदेश दें, पेनल्टी भुगतानों, जीएल उपयोग, इन-चार्ज नियुक्तियों और भत्ता वितरण से संबंधित सभी फाइलों की तत्काल जांच कराएं, दोषी अधिकारियों पर व्यक्तिगत और आपराधिक दायित्व तय करें तथा वित्तीय कदाचार, पद के दुरुपयोग और विश्वासघात के मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की गिरफ्तारी और अभियोजन की कार्रवाई सुनिश्चित करें।



