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आरबीआई की स्थायी सलाहकार समिति की बैठक में यूसीबी ने उठाए नियामकीय मुद्देें

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों से संबंधित नियामक और परिचालन चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए अपनी स्थायी सलाहकार समिति की 40वीं बैठक का आयोजन पिछले सप्ताह किया। बैठक में अर्बन कोऑपरेटिव बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए और उनके शीघ्र समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि यूसीबी का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

लगभग ढाई घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुरमु ने की। बैठक में आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारी आर. लक्ष्मीकांत राव, केशवन रामचंद्रन, सेंटा जॉय सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

देशभर से प्रमुख अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया। इस बैठक में नैफकब के उपाध्यक्ष मिलिंद काले, गुजरात यूसीबी फेडरेशन एवं एनयूसीएफडीसी के चेयरमैन ज्योतिंद्र मेहता, महाराष्ट्र यूसीबी फेडरेशन के चेयरमैन अजय बर्मेचा, आंध्र प्रदेश यूसीबी फेडरेशन के सचिव चलसानी राघवेंद्र राव, उत्तर भारत यूसीबी फेडरेशन के आर.सी. वर्मा, सारस्वत बैंक के चेयरमैन गौतम ठाकुर, कलूपुर कमर्शियल को-ऑपरेटिव बैंक के वाइस चेयरमैन कौशिकभाई पटेल, डीएनएस बैंक के चेयरमैन गणेश धारगालकर सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार आनंद कुमार झा भी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान अर्बन कोऑपरेटिव बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की गई। इनमें हाल ही में जारी गजट अधिसूचनाओं के तहत अयोग्य निदेशकों, निदेशकों के कार्यकाल, तथा निदेशकों के लिए प्रस्तावित तीन वर्षीय अनिवार्य कूलिंग-ऑफ अवधि से संबंधित आरबीआई के ड्राफ्ट मानदंड प्रमुख रहे।

गुजरात अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स फेडरेशन के चेयरमैन ज्योतिंद्र मेहता ने जमा बीमा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि जिन जमाकर्ताओं की जमा राशि 5 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें स्वेच्छा से अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान कर उच्च बीमा कवरेज का विकल्प दिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे “विन-विन समाधान” करार दिया। साथ ही, उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए जमा बीमा कवरेज को बढ़ाकर 15–20 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव रखा।

बैठक में नए यूसीबी को लाइसेंस जारी करने, क्रेडिट सोसाइटियों का यूसीबी में रूपांतरण, शाखा विस्तार के लिए हेडरूम कैपिटल, आवास ऋण की अवधि, लॉन्ग-टर्म सबऑर्डिनेटेड बॉन्ड के माध्यम से पूंजी संवर्धन, पूर्ण डीआईसीजीसी कवरेज, तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के यूसीबी को वित्तीय सहायता समेत अन्य मुद्दों को हितधारकों ने बेबाकी से उठाया।

आंध्र प्रदेश यूसीबी फेडरेशन के सचिव चलसानी राघवेंद्र राव ने डीआईसीजीसी प्रीमियम दरों के युक्तिकरण और जमा बीमा कवरेज बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निदेशकों को ऋण देने पर लगाए गए प्रतिबंधों को सहकारी संस्थाओं की लोकतांत्रिक भावना के विपरीत बताते हुए, पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।

बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुरमु ने सभी मुद्दों को धैर्यपूर्वक सुना और यह आशा व्यक्त की कि उठाए गए कई विषयों पर आने वाले समय में सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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