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नेफस्कॉब की बैठक में ग्रामीण बैंकिंग विकास का रोडमैप तैयार

नेफस्कॉब ने सिक्किम राज्य सहकारी बैंक के सहयोग से मंगलवार को गंगटोक में एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक का आयोजन किया। इसमें देशभर से ग्रामीण सहकारी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सिक्किम के सहकारिता एवं ग्रामीण विकास मंत्री अरुण उप्रेती ने समावेशी आर्थिक विकास में सहकारिता आंदोलन की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने किसानों, उद्यमियों और ग्रामीण परिवारों के समर्थन के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए क्षेत्र की स्थिरता के लिए डिजिटल बैंकिंग, बेहतर शासन, नियामकीय अनुपालन, पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन की आवश्यकता बताई।

इस अवसर पर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के निदेशक मंडल के सदस्य तथा भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल के सदस्य सतीश मराठे ने सहकारी संस्थाओं को विकास का प्रमुख इंजन बताया। उन्होंने ग्रामीण संस्थाओं को मजबूत करने के लिए नवाचार और सहायक कानूनी ढांचे पर बल दिया।

नेफस्कॉब के पूर्व अध्यक्ष कोंडूरु रविंदर राव ने बैठक की मेजबानी के लिए सिक्किम राज्य सहकारी बैंक को बधाई दी और सहकारी क्षेत्र में हालिया नीतिगत विकासों का उल्लेख करते हुए संस्थाओं से बदलते अवसरों के अनुरूप खुद को ढालने का आह्वान किया।

नेफस्कॉब के प्रबंध निदेशक भीमा सुब्रह्मण्यम ने अपने प्रारंभिक संबोधन में चर्चा के प्रमुख विषयों को रेखांकित किया। इनमें अमृत काल (2022–2047) के दौरान अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना के व्यवसाय विस्तार की रणनीतियां, भारत सरकार की टास्क फोर्स की सिफारिशों का क्रियान्वयन तथा सहकारिता मंत्रालय की हालिया नीतिगत पहलें शामिल रहीं।

सिक्किम राज्य सहकारी बैंक के सलाहकार चैतन्य शर्मा ने विश्वास जताया कि विविध विचारों से बैठक को लाभ मिलेगा, जबकि अध्यक्ष डुप पिंत्सो कालिओन ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास सहकारी पहलों के केंद्र में रहने चाहिए। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह श्याम ने जैविक खेती को बढ़ावा देने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश इस क्षेत्र में सिक्किम की उपलब्धियों से प्रेरणा ले रहा है।

सतारा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र सरकले ने बैंक की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सहकारी बैंकों को बदलती बैंकिंग प्रणालियों के साथ कदम मिलाकर चलना होगा।

कार्यक्रम के स्वागत भाषण में सिक्किम राज्य सहकारी बैंक की प्रबंध निदेशक पेमा चेनजोम ने कहा कि राज्य में पहली बार इस स्तर का राष्ट्रीय सहकारी बैंकिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया है और सहकारी बैंक ग्रामीण वित्तीय तंत्र की रीढ़ हैं।

बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों में सहकारी ऋण, नियामकीय एवं पर्यवेक्षी ढांचे, सहकारिता मंत्रालय की पहलें तथा अमृत काल के लिए क्षेत्र की रूपरेखा पर पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें क्षमता निर्माण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस कार्यक्रम में 12 राज्य सहकारी बैंकों, 15 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, प्रशिक्षण संस्थानों और नाबार्ड सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन बिवाश लामिछाने द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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