
चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने सहकारी क्षेत्र में सुशासन, पारदर्शिता और जमीनी स्तर पर मजबूती लाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की है। सहकारिता मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026–27) पर आधारित यह रिपोर्ट सोमवार को लोकसभा में प्रस्तुत की गई और राज्यसभा के पटल पर रखी गई।
समिति ने कहा कि वर्ष 2026–27 के लिए सहकारिता मंत्रालय को 1,744.74 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो 2025–26 के 1,186.29 करोड़ रुपये के बजट अनुमान से अधिक है। समिति ने मंत्रालय से इस बढ़े हुए आवंटन का प्रभावी और इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
समिति की प्रमुख सिफारिशों में सहकारी चुनावों की प्रक्रिया को सुदृढ़ करना शामिल है। समिति ने कहा कि कुछ मामलों में चुनावों में देरी और निर्वाचित बोर्डों का लंबे समय तक अधिग्रहण (सुपरसेशन) सहकारी आंदोलन के मूल सिद्धांत ‘लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण’ को प्रभावित कर सकता है। इस संदर्भ में समिति ने सहकारी चुनावी शासन के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने तथा राज्यों को स्वतंत्र सहकारी चुनाव प्राधिकरण स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने की सिफारिश की।
मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी अधिनियम, 2002 के तहत संचालित सहकारी संस्थाओं के लिए समिति ने एक वैधानिक, स्वतंत्र और पेशेवर रूप से संचालित चुनाव तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि चुनाव पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से कराए जा सकें।
समिति ने बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (एम-पैक्स) के गठन और प्रशिक्षण को गति देने पर भी बल दिया। इसने चार वर्षों में 90,000 नए एम-पैक्स के गठन के लक्ष्य को समर्थन देने वाली प्रस्तावित सहकारी प्रशिक्षण योजना को प्राथमिकता देने की सिफारिश की, ताकि सामाजिक जागरूकता, पंजीकरण सहायता और क्षमता निर्माण सुनिश्चित किया जा सके।
राष्ट्रीय सहकारी पहलों की समीक्षा करते हुए समिति ने ‘भारत ऑर्गेनिक्स’ ब्रांड के तहत जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने में नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड की भूमिका की सराहना की। संस्था ने 11,000 से अधिक सहकारी समितियों को जोड़ा है, 29 उत्पाद लॉन्च किए हैं और दिल्ली-एनसीआर व बेंगलुरु में अपनी खुदरा उपस्थिति का विस्तार किया है। समिति ने सदस्यता बढ़ाने और प्रमाणन प्रक्रियाओं को सरल बनाने की सिफारिश की।
इसी प्रकार, नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड की प्रगति का भी उल्लेख किया गया, जिसने लगभग 13,900 सहकारी समितियों को जोड़ा है और 29 देशों को 40 कृषि उत्पादों का निर्यात किया है। समिति ने अधिक राज्यों और समितियों को इस पहल से जोड़ने तथा प्रशिक्षण और अवसंरचना समर्थन के माध्यम से निर्यात क्षमता बढ़ाने की सिफारिश की।
रिपोर्ट में सहकारी समितियों के लिए हाल में दी गई कर राहतों का भी स्वागत किया गया है, जिनमें अधिभार और न्यूनतम वैकल्पिक कर में कमी के साथ-साथ नकद जमा, भुगतान और निकासी की सीमा में वृद्धि शामिल है।
इसके अलावा, समिति ने कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों के कंप्यूटरीकरण में तेजी लाने, डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत कर किसानों को बेहतर लाभ सुनिश्चित करने, तथा “सहकार से समृद्धि” के विजन के तहत सभी गांवों में बहुउद्देश्यीय पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के विस्तार का आह्वान किया है।
यह रिपोर्ट सहकारी क्षेत्र को अधिक सशक्त, पारदर्शी और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।



