
भारतीय रिजर्व बैंक ने दो सहकारी बैंकों, द यूपी सिविल सेक्रेटेरिएट प्राइमरी कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ और द गुजरात राज्य कर्मचारी कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, अहमदाबाद, पर नियामकीय प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कार्रवाई बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए, जो धारा 56 के साथ पढ़ी जाती है, के तहत की गई है।
11 मार्च 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार, दोनों बैंक भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति के बिना नए ऋण स्वीकृत या नवीनीकृत नहीं कर सकेंगे, निवेश नहीं कर पाएंगे, कोई नई देनदारी नहीं ले सकेंगे और न ही नए जमा स्वीकार कर सकेंगे।
निर्देशों के तहत बैंकों को अपनी वर्तमान तरलता स्थिति के कारण बचत, चालू या अन्य जमाकर्ता खातों से भुगतान करने या निकासी की अनुमति देने पर भी रोक लगा दी गई है। हालांकि, बैंक आवश्यक खर्च जैसे कर्मचारियों के वेतन, किराया और बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि उसने पहले इन बैंकों के निदेशक मंडल और प्रबंधन के साथ उनके संचालन में सुधार के लिए बातचीत की थी, लेकिन पर्याप्त सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाने और पर्यवेक्षण से जुड़ी चिंताएं दूर नहीं होने के कारण जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।
जमाकर्ताओं को जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम के माध्यम से जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम अधिनियम, 1961 के तहत अधिकतम 5 लाख रुपये तक की जमा बीमा सुरक्षा प्राप्त है।
भारतीय रिजर्व बैंक के ये निर्देश फिलहाल छह महीने तक प्रभावी रहेंगे और बैंकों की वित्तीय स्थिति के आधार पर इनकी समीक्षा की जा सकती है।



