
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय द्वारा सहकारी क्षेत्र को सशक्त, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार संरचनात्मक सुधार किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में सहकारी समितियों को केवल संस्थागत ढांचे तक सीमित न रखकर उन्हें सदस्य-केंद्रित, आय-वर्धक और आत्मनिर्भर आर्थिक इकाइयों में परिवर्तित करने के उद्देश्य से आज 17 फरवरी 2026 को गुजरात के महात्मा मंदिर, गांधीनगर में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय मंथन बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे।
इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी भाग लेंगे। यह मंच सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा, अब तक हुई प्रगति का मूल्यांकन तथा राज्यों के अनुभवों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के माध्यम से भविष्य की समन्वित कार्ययोजना तैयार करने का अवसर प्रदान करेगा।
बैठक में दो लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों, डेयरी सहकारी समितियों तथा मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत देशभर में आधुनिक गोदामों के नेटवर्क के विस्तार पर भी विचार-विमर्श होगा, जिससे किसानों को बेहतर भंडारण सुविधा, मूल्य स्थिरता और बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी संस्थाओं, नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड, नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड, में राज्यों की सक्रिय भागीदारी, उनकी भूमिका और अपेक्षाओं पर भी चर्चा होगी। इन पहलों के माध्यम से निर्यात, जैविक खेती और गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता को नई पहचान देने का लक्ष्य है।
बैठक में राज्यों के सहकारिता कानूनों में समयानुकूल संशोधन, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप आदर्श सहकारी अधिनियम को अपनाने, सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने, डेयरी क्षेत्र में परिपत्र अर्थव्यवस्था और सतत विकास को प्रोत्साहन देने तथा अमूल और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन जैसे विषयों पर भी विचार किया जाएगा।
दलहन और मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने, सहकारी बैंकों से संबंधित चुनौतियों के समाधान, साझा सेवा इकाइयों तथा छत्र संरचना को सुदृढ़ करने, सदस्यता विस्तार एवं जन-जागरूकता अभियान को मजबूत बनाने तथा प्रभावी मीडिया एवं संचार रणनीति विकसित करने जैसे मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा रहेंगे।
इसके अतिरिक्त, प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों और रजिस्ट्रार सहकारिता कार्यालयों के कम्प्यूटरीकरण, राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस के प्रभावी उपयोग, मानव संसाधन विकास एवं प्रशिक्षण, तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर राज्यों से अपेक्षाओं पर भी मंथन किया जाएगा।
यह मंथन बैठक सहकारी संघवाद की भावना को और सुदृढ़ करेगी तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत बनाते हुए सहकारिता को जमीनी स्तर पर समृद्धि, रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।



