
‘भारत के क्रेडिट सहकारी क्षेत्र का भविष्य और नियामक चुनौतियाँ’ विषयक सत्र को संबोधित करते हुए नेफकॉब निदेशक उदय जोशी ने कहा कि क्रेडिट सहकारी संस्थाएँ देश में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सस्ते दर पर ऋण उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
जोशी ने बताया कि देश में लगभग 85,000 क्रेडिट सहकारी संस्थाएँ सक्रिय हैं, जो 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि संचालित करती हैं। उन्होंने बुलडाना अर्बन कोऑपरेटिव बैंक का उदाहरण देते हुए कहा कि इसने मुम्बई शाखा में रोबोटिक लॉकर सुविधा स्थापित की, जो सहकारी क्षेत्र में पहली बार हुई।
उन्होंने स्व-नियमन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सहकारी क्षेत्र की विश्वसनीयता और मजबूती इसी पर निर्भर है। जोशी ने यह भी बताया कि सहकार भारती ने स्व-नियमन चार्टर केंद्रीय रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज को सौंपा है, ताकि इसे सहकारी नियमों में शामिल किया जा सके।
“चुनौतियाँ हैं, लेकिन भारत का क्रेडिट सहकारी आंदोलन मजबूत, सशक्त और आत्म-निर्भर है, जो समावेशी विकास और वित्तीय सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है,” जोशी ने कहा।



