
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए, सहकारिता मंत्रालय ने भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर को पत्र लिखकर राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) को नियामकीय राहत देने का अनुरोध किया है। यह कदम एसएलआर निवेशों पर हो रहे मूल्यांकन नुकसान को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
13 अप्रैल 2026 को भेजे गए इस पत्र में मंत्रालय ने बताया कि राज्य सहकारी बैंकों का राष्ट्रीय महासंघ द्वारा प्रस्तुत एक ज्ञापन में राज्य सहकारी बैंकों की चिंताओं का उल्लेख किया गया है। इन बैंकों को ‘एवेलेबल फॉर सेल’ (एएफएस) श्रेणी में रखी गई सरकारी प्रतिभूतियों पर मार्क-टू-मार्केट (एमटीएम) नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय रिज़र्व बैंक के वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को एसएलआर के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना अनिवार्य है। एएफएस श्रेणी की प्रतिभूतियों का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें होने वाली गिरावट (डिप्रिसिएशन) को पूरी तरह उसी वित्तीय वर्ष में दर्शाना होता है, जबकि बढ़त (एप्रिसिएशन) को मान्यता नहीं दी जाती।
मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के चलते वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे बॉन्ड की कीमतों में गिरावट आई है और एसएलआर प्रतिभूतियों पर मूल्यांकन नुकसान हुआ है। इससे राज्य सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
महासंघ ने अपने सुझाव में भारतीय रिज़र्व बैंक के 28 मार्च 2005 के उस दिशा-निर्देश का हवाला दिया है, जिसमें शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को एएफएस से एचटीएम श्रेणी में स्थानांतरित प्रतिभूतियों पर हुए नुकसान को पांच वर्षों में अमोर्टाइज करने की अनुमति दी गई थी।
इसी आधार पर, सहकारिता मंत्रालय ने आरबीआई से अनुरोध किया है कि 31 मार्च 2026 तक एएफएस श्रेणी में रखी गई एसएलआर प्रतिभूतियों पर हुए मूल्यांकन नुकसान को पांच वर्षों में समान वार्षिक किस्तों में समायोजित करने की अनुमति दी जाए, ताकि बैंकों पर तत्काल वित्तीय दबाव कम किया जा सके।
गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों को भी इसी तरह की समस्या पर अपने सुझाव ‘दक्ष’ पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत करने को कहा था। यह निर्देश महाराष्ट्र शहरी सहकारी बैंक महासंघ की ओर से उठाई गई चिंताओं के बाद दिया गया था।
महासंघ ने बताया था कि सरकारी प्रतिभूति (जी-सेक) बाजार में बढ़ती यील्ड के कारण एएफएस श्रेणी में रखे एसएलआर पोर्टफोलियो पर एमटीएम नुकसान हो रहा है, जिससे वित्त वर्ष 2025-26 में सहकारी बैंकों की लाभप्रदता और पूंजी पर्याप्तता पर गंभीर असर पड़ सकता है।



