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सोलापुर डीसीसी बैंक का दमदार प्रदर्शन, कारोबार में बढ़ोतरी के साथ मुनाफा मजबूत

महाराष्ट्र स्थित सोलापुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हासिल किया और लगभग 250 करोड़ रुपये का मुनाफा अर्जित किया है।

वर्ष 2018 में बोर्ड भंग होने के बाद वित्तीय संकट और अनिश्चितता से जूझ रहे इस बैंक ने पूर्व प्रशासक शैलेश कोठीमारे और वर्तमान प्रशासक कुंदन भोले के नेतृत्व में उल्लेखनीय सुधार दर्ज करते हुए स्थिरता और विश्वसनीयता दोबारा हासिल की है।

बैंक का कुल कारोबार 2017-18 के 4,545 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 10,230 करोड़ रुपये हो गया है। जमा राशि 2,330 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,757 करोड़ रुपये हो गई, जबकि कुल निवेश 844 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,079 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी तरह, ऋण पोर्टफोलियो 2,214 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,473 करोड़ रुपये हो गया।

इस बदलाव की एक खास बात यह भी है कि कर्मचारियों की संख्या घटने के बावजूद बैंक ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2018 में 1,216 कर्मचारी थे, जो अब घटकर 777 रह गए हैं, फिर भी बैंक की कार्यकुशलता में सुधार हुआ है।

इसके अलावा, बैंक की शेयर पूंजी 189 करोड़ रुपये से बढ़कर 243 करोड़ रुपये हो गई है। पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) 13% तक पहुंच गया है, जो नियामकीय आवश्यकता 9% से काफी अधिक है। बैंक ने लगभग 1,600 करोड़ रुपये का निवेश सरकारी प्रतिभूतियों में भी किया है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।

भारतीय सहकारिता के साथ बातचीत में बैंक के प्रशासक कुंदन भोले ने बताया कि शुरुआत में बैंक ने वसूली पर विशेष ध्यान दिया, जो सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए एक संरचित व्यवसाय विकास योजना लागू की गई, जिसमें शाखाओं और कर्मचारियों के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए।

उन्होंने बताया कि बचत खातों के विस्तार, माइक्रोफाइनेंस को बढ़ावा, स्वयं सहायता समूहों और संयुक्त देयता समूहों को ऋण देने, तथा वेतन ऋण योजनाएं शुरू करने जैसे कदमों से बैंक की वृद्धि को गति मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने के लिए मोबाइल एटीएम और कैश वैन भी शुरू किए गए।

भोले ने यह भी कहा कि बैंक के परिवर्तन में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कोर बैंकिंग प्रणाली को मजबूत किया गया है, साइबर सुरक्षा उपायों को बढ़ाया गया है और मोबाइल बैंकिंग व इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं शुरू करने की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि भविष्य में एआई आधारित तकनीकों को अपनाकर बैंक को और प्रतिस्पर्धी और ग्राहक-अनुकूल बनाया जाएगा।

बैंक ने अपने पुराने एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) को भी काफी हद तक नियंत्रित किया है। वर्ष 2018 में सकल एनपीए लगभग 42% और शुद्ध एनपीए करीब 23% था, जिसे वन टाइम सेटलमेंट योजनाओं और विशेष वसूली अभियान के जरिए घटाकर शुद्ध एनपीए 5% से नीचे लाया गया है।

इस मजबूत वापसी के साथ सोलापुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक ने न केवल अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया, बल्कि जमाकर्ताओं और हितधारकों का भरोसा भी फिर से जीता है। यह सफलता अन्य घाटे में चल रहे जिला सहकारी बैंकों, जैसे बुलढाणा, वर्धा, नासिक और नागपुर, के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है।

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