
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल के समक्ष केंद्रीय बजट 2026–27 की रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य “तीन कर्तव्यों” के ढांचे पर आधारित है।
नई दिल्ली में आयोजित आरबीआई की केंद्रीय बोर्ड की 621वीं बैठक में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार को अपेक्षा है कि वित्तीय क्षेत्र सतत विकास, व्यापक समावेशन और व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट 2026–27 में राजकोषीय अनुशासन और विकास आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने पर जोर दिया गया है। निवेश को प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और संरचनात्मक सुधारों को गति देने के साथ-साथ उत्पादक क्षेत्रों में मजबूत ऋण प्रवाह, वित्तीय समावेशन को गहरा करने और अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों में प्रणालीगत स्थिरता बनाए रखने हेतु सख्त नियामकीय सतर्कता पर बल दिया गया है।
बैठक के दौरान बोर्ड ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वित्तीय बाज़ारों की अस्थिरता और वैश्विक विकास से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच वैश्विक एवं घरेलू आर्थिक परिदृश्य की व्यापक समीक्षा की। सदस्यों ने मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियों, तरलता की स्थिति, पूंजी प्रवाह तथा भारत की बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली की मजबूती जैसे प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों पर विचार-विमर्श किया।
चर्चा में सुशासन मानकों को सुदृढ़ करने, वित्तीय बाज़ारों को गहरा बनाने तथा डिजिटल नवाचार के माध्यम से वित्तीय तंत्र में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के उपायों पर भी जोर दिया गया। निदेशकों ने केंद्रीय बजट 2026–27 की व्यापक दिशा की सराहना करते हुए उभरती चुनौतियों के बीच विकास की गति बनाए रखने के लिए भारत की वित्तीय संरचना को और मजबूत करने पर अपने विचार साझा किए।
वित्त मंत्री के साथ वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. अरुणिश चावला, व्यय विभाग के सचिव वी. वुअलनम, राजस्व विभाग के सचिव अरविंद श्रीवास्तव तथा मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन उपस्थित रहे।
बैठक में आरबीआई के उप-गवर्नर टी. रबी शंकर, स्वामीनाथन जे., डॉ. पूनम गुप्ता और शिरीष चंद्र मुर्मू सहित केंद्रीय निदेशक मंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।



