
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को लाइसेंस देने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यह जानकारी केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नए यूसीबी को लाइसेंस जारी करने के मौजूदा ढांचे की समीक्षा के लिए परामर्श प्रक्रिया शुरू की है।
वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि शहरी सहकारी बैंक देश की बैंकिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ये विशेष रूप से छोटे व्यापारियों, मध्यमवर्गीय परिवारों, स्थानीय उद्यमियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सहकारी सिद्धांतों पर आधारित यूसीबी परंपरागत रूप से सामुदायिक बैंकिंग और स्थानीय स्तर पर ऋण वितरण पर केंद्रित रहे हैं तथा शहरी और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में वाणिज्यिक बैंकों की भूमिका का पूरक कार्य करते हैं।
उन्होंने दोहराया कि फिलहाल नए यूसीबी को अनुमति देने की कोई तत्काल योजना नहीं है। वहीं, आरबीआई ने 13 जनवरी 2026 को एक चर्चा पत्र जारी कर नए यूसीबी की लाइसेंसिंग से संबंधित विषयों पर हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। इस परामर्श प्रक्रिया का उद्देश्य यह आकलन करना है कि बदलती वित्तीय प्रणाली, तकनीकी प्रगति और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी नई चुनौतियों के मद्देनजर मौजूदा नीति ढांचा कितना उपयुक्त है।
हाल के वर्षों में शहरी सहकारी बैंकों के नियामकीय ढांचे में व्यापक सुधार किए गए हैं। इस पृष्ठभूमि में नए लाइसेंसिंग मानदंडों पर चर्चा को एक सतर्क और संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
क्षेत्रीय जानकारी देते हुए सरकार ने संसद को बताया कि वर्तमान में दिल्ली में 14 शहरी सहकारी बैंक कार्यरत हैं। ये सभी बैंक दिल्ली सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2003 के तहत पंजीकृत हैं और यूसीबी के लिए लागू नियामकीय ढांचे के अंतर्गत कार्य करते हैं। ये संस्थान स्थानीय समुदायों से जमा संग्रहित कर तथा ऋण उपलब्ध कराते हुए विशेष रूप से उन वर्गों की सेवा कर रहे हैं, जिन्हें बड़े बैंकिंग नेटवर्क तक सीमित पहुंच है।
सरकार ने दोहराया कि नए यूसीबी को लाइसेंस देने पर कोई भी निर्णय हितधारकों के सुझावों और नियामकीय पहलुओं की सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।



