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महाराष्ट्र यूसीबी फेडरेशन ने निदेशकों की कार्यकाल सीमा का किया विरोध

महाराष्ट्र अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स फेडरेशन (एमयूसीबीएफ) ने शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के निदेशकों के लिए दो कार्यकाल अथवा अधिकतम 10 वर्ष की सीमा तय किए जाने का कड़ा विरोध किया है। फेडरेशन ने इस प्रावधान को मनमाना, अनुचित और सहकारिता आंदोलन की लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध बताया है।

पिछले सप्ताह पुणे में आयोजित एमयूसीबीएफ की विशेष आम सभा में इस मुद्दे पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। निर्णय लिया गया कि यह प्रस्ताव सभी सदस्य बैंकों को उनके-अपने निदेशक मंडलों में अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

बैठक में महाराष्ट्र भर के टियर-1 से टियर-4 श्रेणी के 155 शहरी सहकारी बैंकों के लगभग 400 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। नेफकॉब के उपाध्यक्ष मिलिंद काले सहित वैशाली आवाडे, दत्ताराम चालके, सतीश गुप्ता, सुभाष मोहिते और सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां भी उपस्थित रहीं।

एमयूसीबीएफ के अध्यक्ष अजय बारमेछा ने कहा कि बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि सहकारी बैंकों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर पूरे क्षेत्र में गहरी चिंता है।

फेडरेशन ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम में वर्ष 2020 और 2025 में किए गए संशोधनों पर भी आपत्ति जताई, जिनसे भारतीय रिज़र्व बैंक का शहरी सहकारी बैंकों पर प्रत्यक्ष नियामकीय नियंत्रण बढ़ा है। एमयूसीबीएफ ने कहा कि धारा 56 के तहत पहले केवल बैंकिंग गतिविधियों के विनियमन तक ही कानून को सीमित रखा गया था, न कि सहकारी संस्थाओं के लोकतांत्रिक शासन में हस्तक्षेप के लिए।

प्रस्ताव में यह भी रेखांकित किया गया कि “सहकारिता” संविधान के अनुसार राज्य सूची का विषय है और राज्य सहकारी अधिनियमों में निदेशकों के कार्यकाल या पात्रता पर ऐसी कठोर शर्तें नहीं हैं। फेडरेशन ने 10 वर्ष की कार्यकाल सीमा के औचित्य पर सवाल उठाए।

एमयूसीबीएफ ने 10 दिसंबर 2025 की गजट अधिसूचना, जिसमें निदेशकों के लिए शैक्षणिक योग्यता सहित पात्रता और अयोग्यता के प्रावधान किए गए हैं, को भी भेदभावपूर्ण बताया। फेडरेशन का कहना है कि ऐसे मानदंड देश के किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि पर लागू नहीं होते।

आम सभा ने एमयूसीबीएफ को सहकारिता मंत्रालय, केंद्र सरकार और आरबीआई से तत्काल संवाद शुरू करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करने सहित कानूनी कदम उठाने के लिए अधिकृत किया है। साथ ही, सांसदों, विधायकों और जिला स्तर के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समर्थन जुटाने का भी निर्णय लिया गया।

गौरतलब है कि एमयूसीबीएफ महाराष्ट्र के सभी जिलों में कार्यरत 466 शहरी सहकारी बैंकों का प्रतिनिधित्व करता है और सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।

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