
सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को सख्ती से लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज ने 1,059 से अधिक बहु-राज्य सहकारी समितियों (एमएससीएस) को कड़ा नोटिस जारी किया है। इन समितियों ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अनिवार्य वार्षिक रिटर्न निर्धारित समयसीमा के भीतर दाखिल नहीं किए हैं।
मंगलवार को जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, सभी डिफॉल्टर समितियों को मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 की धारा 120 का पालन करते हुए 15 दिनों के भीतर सीआरसीएस पोर्टल पर अपने रिटर्न दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में अनुपालन न करने पर कड़ी नियामकीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
जारी सूची के अनुसार, डिफॉल्टर समितियों में लगभग 200 क्रेडिट सहकारी समितियां शामिल हैं। इसके अलावा बैंक कर्मचारियों की थ्रिफ्ट और क्रेडिट सोसायटी, कृषि सहकारी संस्थाएं, हाउसिंग सोसायटी और बहुउद्देश्यीय संघ भी इस सूची में शामिल हैं।
ये समितियां महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, बिहार, केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, असम, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, गोवा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में स्थित हैं। यह सहकारिता क्षेत्र में व्यापक स्तर पर अनुपालन की कमी को दर्शाता है।
सूची के विश्लेषण से पता चलता है कि महाराष्ट्र में सबसे अधिक डिफॉल्टर समितियां हैं, जिससे यह राज्य गैर-अनुपालन के मामले में सबसे आगे है। अहमदनगर, बीड, सोलापुर, पुणे, मुंबई और जलगांव जैसे जिलों में बड़ी संख्या में ऐसी समितियां पाई गई हैं।
सीआरसीएस ने स्पष्ट किया है कि अनुपालन न करने पर अधिनियम की धारा 104 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 1 लाख रुपये तक का जुर्माना और लगातार उल्लंघन की स्थिति में प्रतिदिन 10,000 रुपये का अतिरिक्त दंड शामिल है। इतना ही नहीं, ऐसी समितियों के बोर्ड सदस्यों को धारा 43(2)(ई) के तहत पांच वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी ठहराया जा सकता है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि निर्धारित 15 दिनों के भीतर रिटर्न दाखिल न करने पर संबंधित समिति को गैर-कार्यशील (नॉन-फंक्शनिंग) माना जाएगा, जो नियामकीय सख्ती के संकेत देता है।



