
सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी ने कहा है कि कुछ क्रेडिट सहकारी समितियों में शासन और वित्तीय प्रथाओं को लेकर उठी चिंताओं ने इस क्षेत्र में लोगों के विश्वास को प्रभावित किया है।
मल्टी-स्टेट सहकारी समितियों में पारदर्शी चुनाव पर आयोजित एक तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कई समितियां पूरी तरह से प्रूडेंशियल मानकों का पालन नहीं कर रही हैं, जिससे क्रेडिट सहकारी संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में काफी आलोचना हुई है और भरोसे में कमी आई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कई कर्मचारी-आधारित क्रेडिट सहकारी समितियां अच्छी तरह काम कर रही हैं, लेकिन कुछ समितियों में व्यवस्थाएं सही नहीं हैं।
भूटानी ने कहा कि जमा और ऋण दरों के बीच का अंतर यह दर्शाता है कि क्रेडिट सहकारी संस्थाओं में मजबूत वित्तीय अनुशासन और प्रूडेंशियल मानकों के सख्त पालन की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार केंद्रीय सहकारी समितियां निबंधक कार्यालय के माध्यम से मल्टी-स्टेट सहकारी समितियों की निगरानी को मजबूत करने पर काम कर रही है। इसके तहत बड़ी समितियों में समवर्ती ऑडिट शुरू करना, सरकारी मानकों के अनुरूप ऑडिट मानक विकसित करना और 100 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली समितियों की सख्त निगरानी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बेहतर समन्वय के लिए केंद्रीय सहकारी समिति निबंधक का एक क्षेत्रीय कार्यालय जल्द ही पुणे में खोला जाएगा।



