
भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां – विविध संशोधन निर्देश, 2026’ जारी करते हुए राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड को महत्वपूर्ण नियामकीय छूट प्रदान की है। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45एल के अंतर्गत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए तथा कंपनियां (प्रॉस्पेक्टस और प्रतिभूतियों का आवंटन) नियम, 2014 के नियम 14(7) में उपलब्ध छूट का लाभ देते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक ने निगम को एक वित्तीय वर्ष में निजी निर्गम के माध्यम से 200 से अधिक संस्थाओं को अपनी अंशपूंजी (इक्विटी) के शेयर जारी करने की अनुमति प्रदान की है।
यह छूट देशभर के 1,400 से अधिक शहरी सहकारी बैंकों को शीघ्रता से सदस्य के रूप में शामिल करने के उद्देश्य से दी गई है। कंपनियां अधिनियम, 2013 की धारा 42(2) तथा नियम 14(2) के तहत निजी निर्गम की सीमा 200 व्यक्तियों तक निर्धारित है, जिससे सभी शहरी सहकारी बैंकों को शीघ्र सदस्यता देना संभव नहीं हो पा रहा था।
नव जोड़े गए अनुच्छेद 13ए के अनुसार, इस व्यवस्था के अंतर्गत अंशपूंजी की पेशकश केवल शहरी सहकारी बैंकों तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम को ही की जा सकेगी। निगम को निजी निर्गम की योजना, अवधि और संसाधन प्रबंधन को शामिल करते हुए निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित नीति बनानी होगी। साथ ही, प्रस्ताव पत्र में स्पष्ट उल्लेख करना होगा कि अंश खरीदने वाले शहरी सहकारी बैंक सभी लागू वैधानिक प्रावधानों और भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करेंगे।
निर्देशों के अनुसार, निगम अपनी ही अंशपूंजी के विरुद्ध किसी प्रकार का ऋण, अग्रिम या अन्य वित्तीय सुविधा प्रदान नहीं करेगा। जुटाई गई अंशपूंजी का उपयोग केवल भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा स्वीकृत उद्देश्यों के अनुरूप ही किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, निजी निर्गम से संबंधित सभी वैधानिक और नियामकीय प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन अनिवार्य होगा।
निगम को प्रत्येक तिमाही समाप्त होने के 15 दिनों के भीतर भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय को विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना होगा, जिसमें जुटाई गई अंशपूंजी की राशि, सदस्यों की संख्या एवं श्रेणी तथा तिमाही और संचयी आधार पर सदस्यता राशि का उल्लेख होगा।
अनुच्छेद 13बी के अनुसार, ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और 31 मार्च, 2029 तक प्रभावी रहेंगे, जब तक कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा इन्हें पूर्व में संशोधित, निरस्त या विस्तारित न किया जाए।



