
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात की राजधानी गांधीनगर में ‘सहकार से समृद्धि’ के अंतर्गत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ मंथन बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस अवसर पर इथेनॉल, ऊर्जा, जैविक पोटाश, वेयरहाउस और प्रोटीन पाउडर संयंत्र से संबंधित 265 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया। साथ ही सहकारिता की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों तथा अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष पर आधारित रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, मुरलीधर मोहोल तथा सहकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों को सम्मानपूर्वक जीवन प्रदान करने का सशक्त माध्यम सहकारिता ही बन सकती है।
उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास और पशुपालन क्षेत्रों को सुदृढ़ करने पर बल देते हुए कहा कि देश में अनाज भंडारण क्षमता को तीन गुना बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसमें दो गुना वृद्धि सहकारिता क्षेत्र द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियाँ, सहकारी डेयरियां, राज्य स्तरीय विपणन संघ तथा जिला सहकारी बैंक मिलकर बड़े भंडारण गोदामों का निर्माण करें। विशेषकर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में खरीद, भंडारण और वितरण की समेकित व्यवस्था से परिवहन लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
शाह ने बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः प्रारंभ कर उन्हें बहुउत्पादक इकाइयों में परिवर्तित करने की आवश्यकता बताई, जहां चीनी के साथ इथेनॉल, जैव उर्वरक और गैस जैसे उत्पाद भी निर्मित हों। उन्होंने राज्यों से सहकारिता कानूनों में समयानुकूल संशोधन करने और 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम अपनाने का आह्वान किया।
बैठक में राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी जैविक लिमिटेड तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड में राज्यों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। दो लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना, विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना, सहकारी बैंकों को सरकारी योजनाओं में नोडल एजेंसी बनाने तथा कंप्यूटरीकरण एवं राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
अमित शाह ने कहा कि आने वाले समय में खुदरा मजदूरों, बढ़ई, प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन जैसे श्रमिकों की भी सहकारी संस्थाएं बनाई जाएंगी, जिससे उन्हें सम्मानजनक आय सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निकट भविष्य में देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी सहकारिता से जुड़ जाएगी।



