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श्री संत ज्ञानेश्वर एमएससीएस: लोकपाल ने धनवापसी का दिया आदेश

सहकारी लोकपाल ने महाराष्ट्र के सतारा स्थित श्री संत ज्ञानेश्वर मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी को शिकायतकर्ता लक्ष्मण निरंजन डोंबाले को 2.30 लाख रुपये तथा अद्यतन ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर लौटाने का निर्देश दिया है। यह आदेश सहकारी लोकपाल आलोक अग्रवाल द्वारा परिपक्व सावधि जमा राशि का भुगतान न किए जाने के मामले में पारित किया गया।

8 दिसंबर 2025 की शिकायत के अनुसार, लक्ष्मण निरंजन डोंबाले ने प्रतिवादी सोसायटी में कुल 2.30 लाख रुपये सावधि जमा (एफडीआर) के रूप में निवेश किए थे। इसमें 1.30 लाख रुपये एफडीआर दिनांक 4 सितंबर 2023 तथा 1.00 लाख रुपये एफडीआर दिनांक 6 नवंबर 2023 के अंतर्गत जमा किए गए थे। दोनों जमा एक वर्ष की अवधि के लिए थे।

जमा राशि की परिपक्वता के बाद शिकायतकर्ता ने भुगतान के लिए कई आवेदन दिए। उनका अंतिम अनुरोध 31 अक्टूबर 2025 के पत्र के माध्यम से किया गया था। शिकायत के अनुसार, सोसायटी ने न तो राशि वापस की और न ही किसी पत्राचार का उत्तर दिया, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने सहकारी लोकपाल का दरवाजा खटखटाया।

शिकायत प्राप्त होने के बाद सहकारी लोकपाल कार्यालय ने 5 जनवरी 2026 को प्रतिवादी सोसायटी को नोटिस जारी किया तथा 28 जनवरी 2026 को स्मरण पत्र भेजा, किंतु सोसायटी की ओर से कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। 28 जनवरी 2026 को भेजे गए ईमेल का भी कोई जवाब नहीं मिला।

उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के अवलोकन के उपरांत यह पाया गया कि सोसायटी ने न तो जमा राशि लौटाई और न ही सहकारी लोकपाल कार्यालय के नोटिसों का जवाब दिया।

प्रस्तुत अभ्यावेदनों, दस्तावेजों तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विचार करने के बाद सहकारी लोकपाल ने मामले का निस्तारण करते हुए सोसायटी को आदेश की तिथि से 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को देय राशि अद्यतन ब्याज सहित भुगतान करने तथा अनुपालन प्रतिवेदन लोकपाल कार्यालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

उल्लेखनीय है कि 9 फरवरी 2026 को सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार ने औपचारिक नोटिस जारी कर बहु-राज्य सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत उक्त सोसायटी के विरुद्ध परिसमापन प्रक्रिया आरंभ की है। नोटिस में कहा गया है कि सोसायटी ने अधिनियम की धारा 120 के अंतर्गत निर्धारित समयसीमा में अनिवार्य वार्षिक प्रतिवेदन दाखिल नहीं किए तथा 11 मार्च 2024 और 11 जून 2024 को प्राधिकरण द्वारा जारी आधिकारिक पत्रों का भी उत्तर नहीं दिया।

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