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मल्टी-स्टेट कोऑप्स: कोल्हापुर बैठक में नियामकीय मुद्दों पर चर्चा

फेडरेशन ऑफ मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड द्वारा पिछले सप्ताह शुक्रवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बहु-राज्य सहकारी ऋण संस्थाओं से जुड़े प्रमुख मुद्दों, नियामकीय चुनौतियों और सुशासन से संबंधित पहलुओं पर विचार-विमर्श के लिए एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के केंद्रीय सहकारी समितियां रजिस्ट्रार कार्यालय की संयुक्त रजिस्ट्रार श्रीमती मोनिका खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने बहु-राज्य सहकारी ऋण समितियों पर लागू प्रूडेंशियल मानदंडों की विस्तृत जानकारी दी और नियामकीय अनुपालन के महत्व पर जोर दिया।

श्रीमती खन्ना ने कहा कि बहु-राज्य सहकारी समितियों से जुड़े कई परिचालन एवं नियामकीय मुद्दे वर्तमान में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के विचाराधीन हैं। इन विषयों के शीघ्र समाधान तथा सहकारी संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंत्रालय द्वारा पुणे कार्यालय को शीघ्र कार्यशील करने की योजना बनाई जा रही है।

इंटरएक्टिव सत्र के दौरान प्रतिनिधियों ने कुछ बहु-राज्य सहकारी समितियों द्वारा आवश्यक अनुमति के बिना शाखाएं खोलने और ऐसे तौर-तरीके अपनाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जो सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण हो सकते हैं।

कार्यशाला में बहु-राज्य सहकारी समितियों में चुनाव से जुड़े खर्चों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से चुनाव होने की स्थिति में भी चुनाव व्यय वहन किए जाने की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई।

कार्यक्रम में कोल्हापुर मंडल के डिविजनल संयुक्त रजिस्ट्रार डॉ. महेश कदम तथा कर्नाटक के बेलगावी मंडल के संयुक्त रजिस्ट्रार रविंद्र पाटिल भी उपस्थित रहे। कर्नाटक राज्य सहकारी ऋण समितियां महासंघ लिमिटेड, बेंगलुरु के उपाध्यक्ष डॉ. संजय होसमठ ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता फेडरेशन ऑफ मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड के संस्थापक अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष श्री सुरेश वाबले ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने नियामक प्राधिकरणों और सहकारी संस्थाओं के बीच निरंतर समन्वय को पारदर्शिता, सुशासन और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया।

डॉ. संजय होसमठ ने कहा कि सहकारी आंदोलन केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने सहकारी क्षेत्र को “अवसरों का महासागर” बताते हुए सेवा-आधारित विकास और नवाचार की व्यापक संभावनाओं की ओर संकेत किया।

कार्यशाला में महाराष्ट्र और कर्नाटक की 49 बहु-राज्य सहकारी समितियों के 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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