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आईवाईसी 2025 का समापन, वैश्विक सहयोग का ऐतिहासिक अध्याय

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष (आईवाईसी) 2025 का औपचारिक समापन 31 दिसंबर 2025 को हुआ। यह वर्ष सहकारिता आंदोलन के वैश्विक उत्सव और समावेशी एवं सतत विकास में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने वाला एक ऐतिहासिक अध्याय साबित हुआ। वर्षभर सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ अर्थव्यवस्था, सामुदायिक सशक्तिकरण और साझा समृद्धि के प्रभावी माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया।

भारत में आईवाईसी 2025 का औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। उन्होंने सहकारिता को जन-केंद्रित आर्थिक मॉडल बताते हुए कहा कि यह किसानों, महिलाओं, युवाओं और छोटे उद्यमियों को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में रखता है। उद्घाटन समारोह में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने “सहकार से समृद्धि” के विज़न को रेखांकित किया और सहकारिता को सामाजिक न्याय, आर्थिक लोकतंत्र तथा जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बताया।

वर्ष 2025 के दौरान देशभर में सैकड़ों कार्यक्रम, सम्मेलन, कार्यशालाएं और जनजागरूकता अभियान आयोजित किए गए। राष्ट्रीय स्तर के सहकारी सम्मेलनों से लेकर जमीनी स्तर के अभियानों तक, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी संस्थाओं, महिला-नेतृत्व वाली सहकारिताओं और बहुराज्य सहकारी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय के तहत वर्ष के दौरान कई ऐतिहासिक पहलें की गईं। इनमें राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का शुभारंभ तथा सहकारी क्षेत्र में सुशासन, पारदर्शिता और स्थिरता को सुदृढ़ करने के लिए कई सुधार शामिल रहे।

इफको, कृभको, एनसीयूआई, एनसीडीसी, नाबार्ड, नाफ्सकॉब, नेफकॉब सहित अनेक राष्ट्रीय सहकारी संस्थानों ने मिलकर आईवाईसी 2025 को एक जन-आंदोलन का स्वरूप दिया। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, लद्दाख, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों में सहकारिता सुधार, डिजिटलीकरण, युवा सहभागिता और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। पैक्स के आधुनिकीकरण, ग्रामीण ऋण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और उभरते क्षेत्रों में सहकारी भागीदारी के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया।

इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली, जहां भारत की सहकारिता मॉडल को उसके व्यापक स्वरूप, समावेशिता और प्रभाव के लिए वैश्विक मंचों पर सराहना मिली।

आईवाईसी 2025 के समापन के साथ यह स्पष्ट हुआ कि सहकारिता केवल आर्थिक संस्थाएं नहीं, बल्कि एक जन-आधारित आंदोलन हैं, जो अधिक न्यायपूर्ण और सतत भविष्य के निर्माण में सक्षम हैं।

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