सजावटी मछली: फिशकोफॉड योजना से एक बार फिर बाहर

कृषि मंत्रालय ने विशेष अभियान के माध्यम से देश के सजावटी मत्स्य पालन क्षेत्र को विस्तार देने की दिशा में एक योजना बनाई है, जिस पर कुल खर्च 61.89 करोड़ रुपये होगा और एक बार फिर फिशकोफॉड को इस योजना से बाहर रखा गया।

इस परियोजना में मत्स्य सहकारी समितियों की शीर्ष संस्था फिस्कोफॉड का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

सजावटी मत्स्य पालन पर पायलय प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) द्वारा राज्यों के मत्स्य विभागों के माध्यम से लागू किया जाएगा।

फिशकोफॉड से जुड़े सहकारी नेताओं ने कहा कि अगर सरकार एनएफडीबी को जो मदद देती है उसका 20 प्रतिशत भी हमें मिले तो हम बेहतर परिणाम के साथ मैदान में आ सकते है।

फिशकोफॉड एमडी ने कहा कि “मत्स्य सहकारी वास्तविक मछुआरों का प्रतिनिधित्व करती है जिनका नीली क्रांति में काफी योगदान हैं”। फिशकोफॉड के चार कार्यालय हैं और हमारे पास अन्य राज्यों में सक्रिय मत्स्य पालन महासंघ है।

“मत्स्य पालन क्षेत्र की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए महासंघ को नीति और वित्तीय सहायता के जरिये मजबूत किया जाना चाहिए”, मिश्रा ने रेखांकित किया।

असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के आठ संभावित राज्यों की पहचान की गई है।

सजावटी मत्स्य पालन, ताजे पानी और समुद्री जल दोनों के साथ संबंधित है। हमारे देश के विभिन्न हिस्सों में समुद्री सजावटी मछलियां की लगभग 400 प्रजातियां और 375 ताजे पानी की सजावटी किस्में उपलब्ध हैं।

हालांकि सजावटी मत्स्य पालन सीधे भोजन और पोषण सुरक्षा में योगदान नहीं करती है लेकिन यह आजीविका और आय बढ़ाने में मदद करती है।

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