क्या, सहकारिता विकसित करना एकदम आसान हैं!

हम एक प्रतियोगी दुनिया में रहते हैं, लेकिन हमारी प्रतियोगिता टीम पर आधारित है, टीम के सदस्यों के बीच सहयोग की आवश्यकता होती है। जीवविज्ञानी एडवर्ड ओ विल्सन ने वर्णन किया है कि  मनुष्य से लेकर चींटियों तक सभी सामाजिक प्रजातियों को उत्पन्न तनाव को मूल समस्या के रूप में सामना करना पड़ता है।

कई अर्थशास्त्री भी इस उलझन को समझ नहीं पाए है। इसके अलावा वास्तविकता यह है कि सहकारी उद्यम हमारी आर्थिक प्रणाली में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है और आने वाले समय में इसके बढ़ने की ही संभावना  हैं।

चाहे कार्यकर्ता स्वामित्व वाले व्यवसाय, उपभोक्ता की सदस्यता, वित्तीय संस्थाओं या विपणन/वितरण नेटवर्क के रूप में स्थापित सहकारी संस्थाएँ अधिकतम लाभ की तुलना में अधिक जटिल लक्ष्य का पीछा करते हैं। वे अक्सर लोकतंत्र, शिक्षा और उनके समुदायों के सतत विकास को उच्च प्राथमिकता देते है।

इस वर्ष को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया है। एक भव्य वादे के साथ दुनिया भर में महत्वपूर्ण ईवेंट शेड्यूल के साथ सहकारी कनवर्जेन्स का यह महीना आज  शुरू होता है।

6 अक्टूबर से 11 तक क्यूबेक शहर सहकारी समितियों के एक अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन को अनौपचारिक “सहकारी आंदोलन के दावोस” के रूप में मेजबानी करेगा।

सम्मेलन कार्यक्रम से साफ है कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुदाय को ही लक्ष्य में रखता है। प्रायोजकों की सूची में कनाडा की सरकार सबसे ऊपर है और माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, गूगल, मैक्किंज़े, अर्न्स्ट एंड यंग और डेलॉइट सहित कई बड़े नाम इसकी विशेषता है।

शिखर सम्मेलन के वेब साइट इस आम धारणा को खण्डित करता है कि सहकारिता छोटे स्थानों में विकसित नहीं हो सकते हैं।  दुनिया भर में 300 सबसे बड़ी सहकारी समितियों ने कुल 1.6 खरब डॉलर के बराबर राजस्व उत्पन्न किया है जो कि 2008 में दुनिया की नौवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की आर्थिक शक्ति के बराबर है।

शिखर सम्मेलन एक सहकारी नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रदान करता है, यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर व्यवसाय प्रबंधन कार्यक्रम इस विषय के बारे में कम ही सोचते है। केवल उत्तरी अमेरिका में विशेष रूप से सेंट मैरी विश्वविद्यालय हैलिफ़ैक्स की नोवा स्कोटिया संस्था सहकारी समितियों और क्रेडिट यूनियन में मास्टर प्रबंधन की शिक्षा उपलब्ध कराती है।

ऐसा लगता है कि सहकारी व्यवसायों का विस्तार हो रहा है, शायद अधिक परंपरागत व्यापार मॉडल और अधिक अर्थव्यवस्था से मोहभंग के कारण इसमें रुचि बढ़ती जा रही है।

चाहे वे कभी  देवोस कुलीन वर्गों के लिए खतरा बन सकते है या नही, सहकारी संस्थाएँ वैश्विक खाद्य उत्पादन का एक मुख्य आधार बने रहने वाले हैं। संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के कई देशों में डेयरी, कॉफी और कपास के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा कृषि सहकारी समितियों का है।

संयुक्त राज्य अमेरिका अपने विशाल कृषि व्यवसाय निगमों के लिए जाना जाता है, सहकारी द्वारा 80 प्रतिशत डेयरी उत्पादन होता है  और वे आइसक्रीम के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।

1999 में कई पूर्व बास्कीन-रॉबिन्स फ्रेंचाइजी जो मूल कंपनी से अलग हो गए थे उन्होंने अपने स्वयं के केलेडोस्कूप टेक्सास सहकारिता पर आधारित काम शुरु करने का निर्णय लिया। वे कंपनी के लिए अवसर के साथ साथ उनके मालिक  सदस्यों को अपेक्षाकृत कम लागत प्रदान करते है और कंपनी की नीति निर्धारण में अवसर भी प्रदान करते है।

– नैंसी फॉलब्रे  (मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर, एमहर्स्ट)

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