
2026 में भारत का सहकारी आंदोलन ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में नई ऊर्जा और नए मानकों के साथ आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित कुटेहरा सहकारी कृषि सेवा समिति लिमिटेड एक उल्लेखनीय मिसाल कायम कर रही है।
ग्रामीण क्षेत्र में स्थित कुटेहरा समिति ने अपनी गतिविधियों का दायरा पारंपरिक कृषि ऋण तक सीमित न रखते हुए विविध खुदरा एवं समुदाय-केंद्रित सेवाओं तक विस्तारित किया है।
नाबार्ड की पैक्स-टू-एमएससी योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के बाद समिति ने मोबाइल फोन, टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री के लिए कई आउटलेट शुरू किए हैं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही उचित दरों पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हो रही हैं।
व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ कुटेहरा सहकारी समिति ने सामुदायिक सरोकारों को भी प्राथमिकता दी है। समिति द्वारा चिकित्सा शिविरों का आयोजन, महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा मेधावी विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। ये पहलें ग्रामीण समाज के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने और सामूहिक प्रगति में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
कुटेहरा समिति की यह यात्रा सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रयासों के अनुरूप है। सहकारिता मंत्रालय पैक्स और अन्य सहकारी संस्थाओं के लिए मॉडल उपविधियों के अद्यतन, डिजिटलीकरण तथा पारदर्शिता बढ़ाने जैसे सुधारात्मक कदम लगातार आगे बढ़ा रहा है।
कुल मिलाकर, कुटेहरा सहकारी कृषि सेवा समिति की सफलता यह दर्शाती है कि नवाचार, समावेशन और विविध सेवाओं के समन्वय से सहकारी संस्थाएं ग्रामीण सशक्तिकरण की परिभाषा को नए सिरे से गढ़ रही हैं। अनुकूल नीतियों, तकनीकी सहयोग और जमीनी स्तर की भागीदारी के साथ ऐसी सहकारी संस्थाएं भारत के ग्रामीण परिवर्तन की एक नई और सशक्त गाथा लिखने में सक्षम हैं, जहां आर्थिक व्यवहार्यता और सामाजिक प्रभाव एक साथ आगे बढ़ते हैं।



