
नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने भारत के क्लाइमेट रेजिलिएंस आर्किटेक्चर को मजबूत करने के लिए नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज लॉन्च किया है।
यह पहल खास तौर पर ग्रामीण इलाकों और एग्रीकल्चरल सिस्टम पर फोकस करती है, जिन्हें क्लाइमेट वेरिएबिलिटी से बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ता है। यह चैलेंज गेट्स फाउंडेशन और डलबर्ग एडवाइजर्स के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसका मकसद इनोवेटर्स को ऐसे एडवांस्ड डिजिटल सॉल्यूशन डेवलप करने के लिए बढ़ावा देना है जो बेहतर फोरकास्टिंग और रिस्क मैनेजमेंट के लिए क्लाइमेट डेटा को इंटीग्रेट करते हैं।
नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी के. वी. ने कहा कि समस्या डेटा की कमी नहीं, बल्कि उसके एकीकरण और सुलभता की है। इस चुनौती के माध्यम से विभिन्न स्रोतों के डेटा को एकीकृत कर एक ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जो समय रहते प्रभावी निर्णय लेने में सक्षम बनाए।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य “राष्ट्रीय जलवायु स्टैक” तैयार करना है, जो पूर्वानुमान, विश्लेषण और अनुप्रयोग स्तरों को जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल ढांचा होगा। प्रतिभागियों को 10–15 वर्षों की अवधि के लिए विश्वसनीय जलवायु जोखिम पूर्वानुमान मॉडल और व्यावहारिक उपयोग वाले डैशबोर्ड तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिनका उपयोग फसल योजना, आपदा प्रबंधन और ऋण जोखिम आकलन में किया जा सके।
यह प्रतियोगिता बहु-स्तरीय प्रक्रिया के तहत आयोजित की जाएगी। मार्च 2026 में आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, अप्रैल में चयन प्रक्रिया पूरी होगी, और चयनित टीमों को 6 से 8 सप्ताह तक विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। अंतिम मूल्यांकन के बाद जून 2026 में विजेताओं की घोषणा की जाएगी।
प्रतिभागियों का मूल्यांकन वैज्ञानिक गुणवत्ता, व्याख्येयता, विस्तार क्षमता, परस्पर-संगतता और व्यावहारिक उपयोगिता जैसे मानकों पर किया जाएगा। यह पहल नाबार्ड के ‘डेटा इन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर (डीआईसीआरए)’ प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसे आगे एक व्यापक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित किया जाएगा।
प्रतियोगिता के शीर्ष तीन विजेताओं को क्रमशः 15 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 5 लाख रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके अलावा, चयनित समाधानों को नाबार्ड के कार्यक्रमों के माध्यम से लागू और विस्तार करने का अवसर भी मिलेगा।
इस पहल के माध्यम से नाबार्ड और उसके साझेदार देश के नवाचार तंत्र को एकजुट कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद जलवायु चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।



