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सहकारी बैंक राजनीतिक दबाव से मुक्त: सरकार का संसद में दावा

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी दी कि देश के सहकारी बैंक एक मजबूत नियामकीय और पर्यवेक्षण ढांचे के तहत कार्य कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य उन्हें राजनीतिक हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के साथ समन्वय में कई संरचनात्मक और नियामकीय सुधार लागू किए हैं।

चौधरी ने कहा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में संशोधन कर सहकारी बैंकों के निदेशक मंडल (अध्यक्ष और पूर्णकालिक निदेशकों को छोड़कर) के कार्यकाल को अधिकतम 10 लगातार वर्षों तक सीमित किया गया है। इसका उद्देश्य बेहतर शासन सुनिश्चित करना और शक्ति के केंद्रीकरण को रोकना है।

उन्होंने आगे बताया कि बहु-राज्य सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 में संशोधन कर सहकारी लोकपाल (ओम्बड्समैन) तंत्र शुरू किया गया है, जिससे सदस्य जमा, लाभों के न्यायसंगत वितरण और अन्य अधिकारों से जुड़े मामलों में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की स्थापना की गई है, जो बहु-राज्य सहकारी समितियों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेगा।

नियामकीय स्तर पर, भारतीय रिज़र्व बैंक ने वर्ष 2024 में धोखाधड़ी प्रबंधन पर मास्टर निर्देश जारी किए हैं। इनमें समयबद्ध रिपोर्टिंग, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और कर्मचारियों, तीसरे पक्ष एवं ऑडिटरों की स्पष्ट जवाबदेही का प्रावधान है।

इसके अलावा, आरबीआई का प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) ढांचा वित्तीय रूप से कमजोर सहकारी बैंकों के लिए समय पर सुधारात्मक कदम उठाने को अनिवार्य बनाता है, जिससे स्थिरता बहाल हो सके और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा हो।

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने राज्य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए टर्नअराउंड प्लान (टीएपी) भी लागू किया है, जिसमें शासन सुधार, लागत नियंत्रण, तकनीकी उन्नयन और व्यवसाय विविधीकरण पर जोर दिया गया है।

जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम के माध्यम से 5 लाख रुपये तक की जमा राशि (मूलधन और ब्याज सहित) का बीमा कवर प्रदान किया जाता है।

सरकार ने शहरी सहकारी बैंकों में जोखिम-आधारित आंतरिक लेखा परीक्षा (आरबीआईए) प्रणाली लागू करना भी अनिवार्य किया है, जिससे आंतरिक नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन मजबूत हो सके।

मंत्री ने कहा कि ये सभी उपाय मिलकर सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और मजबूती बढ़ाने के साथ-साथ जनता का विश्वास सुदृढ़ करने में सहायक होंगे।

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