
नीति आयोग ने अपने स्टेट सपोर्ट मिशन के तहत पटना में “पूर्वी भारत में किसान संगठनों का सशक्तिकरण: प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पैक्स) पर विशेष फोकस” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर के हितधारकों ने भाग लिया तथा कृषि संस्थाओं को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला का उद्घाटन प्रमोद कुमार ने किया, जिन्होंने ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने और किसानों की बाजार एवं ऋण तक पहुंच बढ़ाने में सहकारिताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
रमेश चंद ने कहा कि पैक्स जैसे किसान संगठनों की भूमिका समावेशी और क्षेत्रीय संतुलित कृषि विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मजबूत जमीनी संस्थाएं किसानों की उत्पादकता, लचीलापन और आय सुरक्षा को बढ़ाने में अहम योगदान दे सकती हैं।
इस दौरान राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के गोवर्धन सिंह रावत ने पैक्स के तीव्र कंप्यूटरीकरण और संस्थागत समन्वय को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि कार्यक्षमता और पारदर्शिता में सुधार हो सके। रजनीश कुमार सिंह ने क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में सहकारिताओं की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पी.एस. पांडेय ने मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता सुधार और कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे किसानों की घरेलू और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके।
इस कार्यशाला में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, एपीडा, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम तथा नेफेड सहित कई प्रमुख संस्थानों ने भाग लिया।
राज्य सरकारों, विभिन्न राज्यों की पैक्स, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्टार्टअप्स और प्रगतिशील किसानों के प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में सक्रिय भागीदारी की।
इस कार्यशाला का उद्देश्य सहयोग को बढ़ावा देना, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना और किसान संगठनों को सशक्त बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना है, जिससे पूर्वी भारत सहित पूरे देश में कृषि क्षेत्र को अधिक सशक्त, प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाया जा सके।



