
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूरिया की कीमत बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। साथ ही, सरकार देशभर में उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य में सुधार को बढ़ावा देने के लिए यूरिया बैग के आकार में कमी करने की नीति पर आगे बढ़ रही है।
लोकसभा में लिखित उत्तर में अनुप्रिया पटेल ने बताया कि यूरिया बैग का आकार 50 किलोग्राम से घटाकर 45 किलोग्राम और कुछ मामलों में 40 किलोग्राम करना एक सोची-समझी नीति है। इसका उद्देश्य यूरिया के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण करना और किसानों को वैज्ञानिक एवं संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि इस कदम से किसानों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। वर्तमान में 45 किलोग्राम नीम-लेपित यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 242 रुपये प्रति बैग है, जिसमें नीम कोटिंग शुल्क और कर शामिल नहीं हैं। वहीं, सल्फर-लेपित यूरिया की कीमत 40 किलोग्राम बैग के लिए 254 रुपये निर्धारित है, जो करों और जीएसटी से अलग है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि भारत में लंबे समय से उर्वरकों के असंतुलित उपयोग की समस्या रही है, जिसमें यूरिया का उपयोग अन्य पोषक तत्वों की तुलना में अधिक होता है। इसके कारण मृदा उर्वरता में गिरावट, फसल उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव और पर्यावरणीय समस्याएं जैसे भूजल प्रदूषण तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ा है।
बैग के आकार में कमी के जरिए नीति-निर्माता किसानों को उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग की ओर प्रेरित करना चाहते हैं। इसके साथ ही फॉस्फेटिक, पोटाशिक उर्वरकों और जैविक विकल्पों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें नैनो उर्वरक और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाएं भी शामिल हैं।
भारत में उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था अभी भी यूरिया की कीमतों को किफायती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, सरकार सब्सिडी के माध्यम से लागत का बड़ा हिस्सा वहन कर रही है, ताकि किसानों को मूल्य वृद्धि का सामना न करना पड़े।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बैग साइज में कमी एक छोटा लेकिन प्रभावी कदम साबित हो सकता है, जो समय के साथ किसानों के व्यवहार में बदलाव लाकर उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने में मदद करेगा। हालांकि, इसके साथ किसान जागरूकता, विस्तार सेवाओं और संतुलित उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
सरकार ने दोहराया कि किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना और दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य व उत्पादकता को सुरक्षित रखना उसकी प्राथमिकता है।



