
सहकारिता आंदोलन की जानी-मानी हस्ती तथा प्रभाकर कोरे मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी के संस्थापक डॉ. प्रभाकर कोरे को पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान उन्हें शिक्षा, कृषि और सहकारी क्षेत्र में उनके आजीवन योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
डॉ. कोरे ने वैज्ञानिक और सतत कृषि को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है। वर्ष 2011 में उन्होंने बेलगावी के मट्टिकोप्प में आईसीएआर–केएलई कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की स्थापना की, जो आज कृषि अनुसंधान, किसानों के प्रशिक्षण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस केंद्र से अब तक हजारों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
कृषि शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. कोरे का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने केएलई स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की स्थापना कर कृषि को एक सम्मानजनक और व्यावहारिक पेशे के रूप में प्रोत्साहित किया, विशेष रूप से कृषि पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए।
सहकारी क्षेत्र में भी उनका प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। चिक्कोडी स्थित चिदानंद बसप्रभु कोरे सहकारी शुगर फैक्ट्री को एक आदर्श सहकारी संस्था के रूप में देखा जाता है, जिसने किसानों को उचित मूल्य, रोजगार के अवसर और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर, डॉ. कोरे ने नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ), नई दिल्ली के निदेशक के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने नीति निर्माण और देश के सहकारी चीनी उद्योग को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. कोरे सहकारी बैंकिंग के माध्यम से वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण के भी प्रबल समर्थक रहे हैं। इस दिशा में उन्होंने बेलगावी में रानी चन्नम्मा महिला सहकारी बैंक नियामित की स्थापना सहित कई महत्वपूर्ण पहल कीं।



